नमस्कार दोस्तों, राजेंद्र देव फिर से हाजिर हूं अपनी पहली देसी सेक्स स्टोरी के अगले भाग के साथ। पिछली कहानी में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी बहन की ननद रवीना की कुंवारी चूत फाड़ी और हम दोनों ने जमकर चुदाई की।
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अब आगे की कहानी…
उस रात के बाद रवीना पूरी तरह बदल चुकी थी। अब वो खुद ही मौके ढूंढने लगी थी। गांव की गर्मी, खेतों की सुनसान जगहें और रात की अंधेरी चारपाइयां हमारे लिए चुदाई के सबसे अच्छे सहारे बन चुकी थीं।
एक दिन दोपहर को हम दोनों सरकारी स्कूल की पुरानी इमारत के पीछे वाले कमरे में घुस गए। वो कमरा काफी दिनों से बंद पड़ा था। अंदर घुसते ही मैंने रवीना को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदना शुरू कर दिया। उसकी सलवार नीचे सरकाई, पैंटी किनारे पर की और अपना ६ इंच का मोटा लंड उसकी अब खुल चुकी लेकिन फिर भी तंग चूत में घुसा दिया।
“आह्ह्ह… राज… तेज… और तेज…” रवीना अपनी कमर हिलाते हुए फुसफुसा रही थी।
मैं उसके भारी-भारी चुच्चों को पीछे से दबाते हुए जोर-जोर से ठोके मार रहा था। कमरे में चूत की चिकनी “पच-पच” की आवाजें गूंज रही थीं। रवीना की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी और मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
तभी अचानक दरवाजा खुला और स्कूल का ४५-५० साल का टीचर रामलाल अंदर आ गया।
हम दोनों घबरा गए। रवीना ने तुरंत अपनी सलवार ऊपर खींचने की कोशिश की लेकिन मेरे लंड अभी भी उसकी चूत में आधा घुसा हुआ था।
टीचर ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे राजेंद्र… रवीना… तो ये चल रहा है यहां? बहुत दिन से शक हो रहा था।”
रवीना शर्म से लाल हो गई। मैंने कुछ बोलने की कोशिश की लेकिन टीचर ने हाथ उठाकर रोका।
“चिंता मत करो। मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा… बस एक शर्त है।” उसने अपनी पैंट पर हाथ रखते हुए कहा, “मुझे भी एक बार इस माल को चोदने दो।”
रवीना ने पहले साफ मना कर दिया।
लेकिन अब हाथ आई यह माल इस हरामी टीचर के हाथ से जाने देने वाला नहीं था। उसकी आंखों में लालच और घिनौनी कामुकता चमक रही थी। उसने अपनी जेब से फोन निकाला और उसे सामने करके धीरे से बोलने लगा, “देखो, चाहता तो मैं तुम्हारी फोटो और वीडियो लेकर तुम्हें बदनाम कर सकता था, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया।”
उसकी आवाज में छिपा खतरा और वादा दोनों साफ महसूस हो रहे थे। रवीना का चेहरा सफेद पड़ गया। उसकी सांसें तेज हो गईं और हाथ कांपने लगे। टीचर आगे बोला, “अब तुम लोग सोच लो, खासकर रवीना। चुदाई का मजा तो तुम ले ही रही हो। थोड़ा और मजा मिल जाएगा। एक अच्छी जगह मिल जाएगी जहां रोज अपनी प्यास बुझा सको। वरना भटक-भटक कर चुदाई करो। आज नहीं तो कल कोई न कोई वीडियो निकलकर तुम्हें बदनाम कर ही देगा। सब मेरे जैसे मुंह पर बोलने वाले नहीं होते।”
काफी देर तक चली इस तीखी बहस में रवीना का मन हार मानने लगा। उसकी आंखों में शर्म, डर और मजबूरी के मिले-जुले भाव थे। आखिरकार उसने हार मान ली और धीमी, कांपती आवाज में बोली, “बस एक बार करने दे रही हूं।”
टीचर: हाँ एक बार करलो, अगर उसके बाद फिरसे नहीं करना होगा तो ये तुम्हारा मन, मैं कुछ नहीं बोलूंगा।
टीचर ने तुरंत अपना लंड बाहर निकाला। उसका लंड करीब नौ इंच लंबा और काफी मोटा था। उसकी मोटी शिराएं उभरी हुई थीं और सिरा चमकदार लाल रंग का था। लंड देखते ही रवीना के मुंह में पानी आ गया। वो मेरी तरफ देखकर शर्म के साथ मुस्कुराती हुई बोली, “सर का लंड कितना बड़ा है यार।”
उसने रवीना को घुटनों के बल बैठा दिया और अपना मोटा लंड उसके मुंह में ठूंस दिया। रवीना का मुंह पूरी तरह फैल गया। “चूस… अच्छे से चूस मेरी जान…” टीचर ने उसके बालों को पकड़कर कहा। रवीना पहली बार किसी दूसरे आदमी का लंड मुंह में ले रही थी। वो भी इतना मोटा और लंबा।
उसने अभी तक सिर्फ मेरे छह इंच के लौड़े का ही स्वाद लिया था। शुरू में उसे उल्टी जैसा लगा। उसकी आंखों से आंसू निकल आए और गला भारी हो गया। लेकिन फिर धीरे-धीरे वो चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से को चाट रही थी।
मैं पीछे से उसकी चूत में तीन उंगलियां डालकर उसे तैयार कर रहा था। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। गर्म और चिपचिपा रस मेरी उंगलियों पर लग रहा था। वो कमर उचकाकर लंड खाने का मजा ले रही थी।
फिर मैं नीचे लेट गया। वो मेरे मुंह पर बैठ गई और टीचर का लौड़ा चूसने लगी। नीचे से मैं उसकी गरमागरम चूत को लगातार चाटे जा रहा था। मेरी जीभ उसकी फूली हुई क्लिटोरिस पर घूम रही थी। रवीना की सांसें भारी हो गईं। वो बार-बार कांप उठती।
कुछ देर चूसने के बाद टीचर ने रवीना को झुका दिया। मैं उसके सामने खड़ा हो गया और अपना लंड उसके मुंह में दे दिया। टीचर ने पीछे से उसकी चूत में एक जोरदार धक्का मारा। “आआआह्ह्ह्ह…!” रवीना की चीख मेरे लंड से दब गई। उसका पूरा शरीर एक झटके से कांप उठा।
मैं इतने दिनों से ये चूत मार रहा था लेकिन टीचर का लंड अभी रवीना की चूत के लिए बड़ा था। हर धक्के पर वो सिसक उठती। टीचर ने रवीना की चूत की खूब पेलाई की। वो बहुत खतरनाक चुदाई कर रहा था। हर ठोके के साथ रवीना का पूरा शरीर हिल रहा था। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। चूत से चू-चू की आवाजें निकल रही थीं। मैं उसके मुंह में लंड देता रहा।
फिर हमने पोजीशन बदली। मैं लेट गया। रवीना मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे लंड पर चढ़ गई। उसकी गीली और गरम चूत मेरे मोटे लंड को धीरे-धीरे निगल रही थी। वो अपनी कमर को ऊपर-नीचे करके मेरे लंड की सवारी करने लगी। हर बार नीचे बैठते समय उसकी चूत की गहराई तक मेरा लंड घुस जाता। रवीना की आहें निकल रही थीं। उसकी आंखें बंद थीं और चेहरा कामवासना से लाल हो रहा था।
टीचर ने उसकी मुंह में अपना लंड दे दिया। अब वो टीचर का मोटा लंड चूसते हुए मेरे लौड़े की सवारी करने लगी। उसके मुंह से चूसने की चुट-चुट की आवाजें आ रही थीं। टीचर उसके सिर को पकड़कर गले तक लंड ठेल रहा था। रवीना का पूरा शरीर हिल रहा था। उसकी छातियां ऊपर-नीचे उछल रही थीं। मैं नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी।
हम दोनों ने उसे लगातार पोजीशन बदल-बदल कर तीस से चालीस मिनट तक चोदा। कभी वो मेरे ऊपर सवार होती, कभी टीचर पीछे से उसकी चूत पेलता और मैं मुंह में लंड देता। कभी दोनों तरफ से उसे सैंडविच करके जोरदार चुदाई करते। रवीना की चीखें, कराहें और आहें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। उसकी चूत से लगातार रस बह रहा था।
आखिर में टीचर ने उसके मुंह में झड़ दिया। उसका गाढ़ा वीर्य रवीना के गले में उतर गया। वो उसे निगलते हुए खांस रही थी। मैंने उसकी चूत के अंदर अपना गर्म वीर्य भर दिया। मेरे लंड के फड़कने के साथ गर्म-गर्म झटके उसके अंदर जा रहे थे। रवीना का शरीर अंतिम बार जोर से कांपा और वो थककर हम दोनों के बीच लेट गई।
उस दिन के बाद रवीना को दो लंडों का चस्का लग गया। अगले दिन ही मैंने उसकी गांड की सील तोड़ दी। फिर उसने एक साथ दो लंड लिए, एक चूत में और एक गांड में। उसकी चीखें और मजा दोनों एक साथ बढ़ गए थे।
आज के लिए बस इतना ही दोस्तों, मौका मिलेगा तो अगली कहानी भी जरूर लिखूंगा कि कैसे रवीना ने अपनी एक सहेली को मेरे लण्ड पर चढ़ाया और बदले में मैंने भी उसको एक बेहतरीन तौफा दिया। तब तक के लिए अलविदा दोस्तों।
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