दोस्तो, मैं प्रेम फिर से अपनी कहानी लेकर आया हूँ। इसमें मैं अपनी गांड की सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ कि इसका उद्घाटन कैसे हुआ।
मेरी पहली कहानी भैया ने लंड दिखाया में मैंने बताया कि कैसे मुझे पहला लण्ड मिला और मैंने चूसा। उन भैया को किसी काम से लंबे समय के लिए गांव जाना पड़ा और मेरी सेक्स कहानी रुक सी गयी थी।
लेकिन मुझे क्या पता था कि मुझे एक नया लण्ड जल्द मिलने वाला था। एग्जाम का टाइम था। मेरा पड़ोस में रहने वाला एक लड़का मेरे ही साथ में पढ़ता था। वो पढ़ाई में कमज़ोर था और फेल होकर मेरी क्लास में आ गया था।
मैं पढ़ने में ठीक ठाक था तो उसने एक दिन मुझे बोला- एग्जाम आने वाला है, मेरी थोड़ी मदद कर दो! मैंने हाँ बोल दिया और बोला- घर आ जाना। रोज़ 2 घण्टे साथ में पढ़ेंगे।
वो खुश हो गया। इस तरह उससे मेरी दोस्ती हो गई। उसका घर आना जाना शुरू हो गया। मैं चड्डी नहीं पहनता था और गर्मी होने के कारण ढीला हाफ पैंट पहनता था। एग्जाम होने के कारण वो कभी कभी रात में मेरे घर में रुक जाया करता था।
एक बार मैं दिन में घर पर अपने रूम में सोया हुआ था। चूंकि गर्मी का दिन था इसलिए शरीर पर केवल ढीला निकर ही था।
तभी राजेश घर आया और मेरी मम्मी से मेरे बारे में पूछा। मम्मी ने उसे मेरे रूम में भेज दिया।
मैं रूम में नींद में सोया हुआ था। मेरा निकर ढीला होने के कारण मेरे आधे चूतड़ नंगे दिख रहे थे। वो रूम में आया और मेरे पैर को सहलाते हुए अपना हाथ मेरे चूतड़ों पर फिराने लगा।
उसकी उंगलियां धीरे-धीरे मेरी नंगी गांड की गोलाई पर घूम रही थीं। गर्मी के कारण मेरी त्वचा पसीने से थोड़ी नम थी। उसकी हथेली की गर्माहट मेरे चूतड़ों में समा रही थी।
उसने हल्का दबाव डालते हुए अपनी उंगलियों को मेरी गांड की दरार की तरफ सरकाया। नरम मांसल चूतड़ों को सहलाने से मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
मेरी नींद टूट गई लेकिन मैं सोने का बहाना करने लगा क्योंकि अंदर ही अंदर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
लेकिन मैंने ज्यादा देर तक सोने का नाटक नहीं किया। मैं उठा और बोला- अरे तुम कब आये?
उसने इसका जवाब नहीं दिया। उसके चेहरे पर साफ हवस झलक रही थी। उसकी आँखें मेरे नंगे चूतड़ों पर टिकी हुई थीं। हवस तो मेरे अंदर भी तेजी से जाग रही थी लेकिन मैंने चेहरे पर कुछ नहीं आने दिया।
वो मेरी तरफ देखे बिना ही बोला- तुम्हारा शरीर तो बहुत सेक्सी है; तुम तो एकदम लड़की की तरह चिकनी हो यार!
मैं शर्माते हुए बोला- भक साला।
वो समझ गया कि मुझे भी ये सब अच्छा लग रहा है। उसकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं। वो उठ खड़ा हुआ और कमरे का दरवाजा धीरे से बंद कर दिया। फिर उसने चिटकनी चढ़ा दी। कमरे में अचानक एक गर्म और बंद महौल बन गया।
फिर वो मेरे पास आया और बोला- चल हम लोग नंगे होकर एक दूसरे का लण्ड नापते हैं।
मैंने भी हाँ बोल दिया। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई थी।
उसने अपनी पैंट की चेन खोली और उसे नीचे सरका दिया। उसका लण्ड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था। मैं उसके लण्ड को गौर से देखने लगा।
तो उसने बोला- तुम भी अपना लण्ड दिखाओ?
और फिर उसने मेरे हाफ पैंट को खींच दिया। हाफ पैंट ढीला होने के कारण वो आसानी से खुल गया। अब मैं पूरी तरह नंगा हो गया था। उस समय मेरा झांट की जगह रोयां ही हुआ था। गोरा होने के कारण मैं बहुत ही आकर्षक दिख रहा था।
मैंने उसके लंड को देखा। उसका लंड मेरे लण्ड से बड़ा और मोटा था और आकर्षक दिख रहा था। उसकी मोटी नसें उभरी हुई थीं और सिरा चमक रहा था।
उसने अपने लण्ड की तरफ इशारा करके पूछा- कैसा है?
मैं बोला- मस्त है।
अब उसने अपना टीशर्ट उतारा और वो भी पूरा नंगा हो गया।
मैं बेड पर लेटा ही हुआ था, वो भी बेड पर आ गया और मेरे से लिपट गया। उसका गर्म शरीर मेरे शरीर से चिपक गया। उसने अपने लण्ड को मेरे लण्ड से रगड़ते हुए टकराने लगा।
मैं बोला- यार तेरा लण्ड तो बहुत मस्त है और मेरे लण्ड से बड़ा और मोटा भी है।
उसने पूछा- तुम्हें पसंद आया?
मैंने हाँ में जवाब दिया।
मैंने पूछा- तुमको क्या पसंद आया?
उसने मेरी गांड की तरफ देखा और बोला- तेरी चिकनी गांड से मेरे लण्ड को प्यार हो गया है।
और वह मेरे गांड को सहलाने लगा। उसकी उंगलियां मेरी नरम, गोल चूतड़ों को दबाती हुई घूम रही थीं।
फिर उसने मेरे गालों पर जोरदार चुम्मा लिया और गर्दन को चूमने लगा। मैं तो जन्नत का मजा ले रहा था। वो जितना मुझे चूमता, मुझमें उतनी मदहोशी छा रही थी।
मैं उसका लण्ड अपने हाथ में लेकर हिलाने लगा और उसके अंडों को सहलाने लगा। उसका लण्ड मेरी हथेली में गर्म और मोटा महसूस हो रहा था।
वो सिसकारी मारने लगा और बोला- बहुत मज़ा आ रहा है। ऐसे ही सहलाओ।
और वह अपनी उंगली से मेरी गांड का छेद सहलाने लगा। इससे मैं उससे एकदम चिपक गया।
उसने मेरे होंठों को चूम लिया और फिर उसे चूसने लगा। मैंने अपने को उसके हवाले कर दिया।
कुछ देर बाद उसने मुझे पलटा और मेरे पीछे चढ़ गया। उसने गर्दन और पीठ को चूसने चाटने लगा। मैं मदहोश हो गया।
फिर वो नीचे आया और मेरे चूतड़ों को चूमने चाटने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरी गांड की दरार में घूम रही थी। फिर उसने मेरी गांड की दरार में ढेर सारा थूक लगा दिया और गांड में उंगली करने लगा। मैं बस आंखें बंद कर मज़ा ले रहा था।
कुछ देर बाद उंगली आराम से मेरी गांड में जाने लगी।
अब उसने मुझे पलटा और बोला- मेरा लण्ड चूसोगे।
मैं उठा और उसके लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। उसका लंड से पानी की तरह चिपचिपा पदार्थ निकल रहा था लेकिन मुझे उसका स्वाद बहुत बढ़िया लग रहा था।
धीरे धीरे मैंने उसका पूरा लण्ड मुँह में ले लिया।
कुछ देर बाद उसने अपना लण्ड मेरे मुख से निकाल लिया और बोला- अब अपनी गांड को भी इसका मज़ा लेने दो।
उसने मुझे लिटाया और अपने लण्ड के सुपारे को मेरे गांड के छेद पर रखा और ऊपर नीचे करने लगा।
उसका लंड से निकल रहा चिपचिपा पदार्थ मेरी गांड को गीला कर रहा था। गर्म और चिपचिपा तरल मेरी संकरी गांड की दरार में फैल रहा था। उसके बाद उसने मेरी गांड के छेद पर रख कर जोर से धक्का मारा तो उसका सुपारा मेरी गांड को चीरते हुए अंदर घुस गया।
मैं दर्द से चिल्लाने ही वाला था कि उसने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख दिया। मेरी आवाज़ दब गयी। मेरी आँखें फट गईं और पूरा शरीर तन गया था। कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने पर दर्द कुछ कम हुआ तो वह धीरे धीरे अपना लण्ड मेरी गांड के अंदर बाहर करने लगा।
दो मिनट बाद मेरा दर्द खत्म हो गया और मुझे भी मज़ा आने लगा। मैंने अपनी दोनों टांगों को फैला दिया। कुछ देर बाद फिर उसने एक जोरदार धक्का मारा और अपना पूरा लण्ड मेरे गांड में पेल दिया।
दर्द से मेरी हालत खराब हो गयी लेकिन चीख़ नहीं निकल पाई। मेरी आँखों से आंसू निकल आये। वो फिर कुछ देर रुका और मेरे गीले होंठों को चूमने लगा। कुछ देर में मेरा दर्द कम हुआ तो वह धीरे धीरे अपनी कमर चलाने लगा।
कुछ देर में उसका दर्द कम हो गया और उसकी स्पीड भी बढ़ गयी। उसके प्री-कम की चिकनाहट से लण्ड आराम से मेरी गांड के अंदर बाहर जा रहा था। कुछ देर में मैं भी अपनी कमर हिला कर उसका साथ देने लगा।
इसी बीच वो अपनी जीभ को मेरे मुँह में डाल कर मेरे होंठों को चाटता रो मैं भी अपनी जीभ से उसकी जीभ को चाटता।
20 मिनट तक उसने मेरी गांड को जबरदस्त चुदाई की और फिर हांफते हुए मेरे गांड में ही झड़ गया।
उसके वीर्य की गर्मी मुझे गांड में महसूस हो रहा था और मैं भी साथ में झड़ गया।
वो मेरी गांड में लण्ड डाले हुए ही मेरे ऊपर लेट गया। मैं भी अपने दोनों पैरों से उसके कमर को पकड़ कर लेता रहा।
5 मिनट बाद उसने अपना लण्ड बाहर निकाला। मेरी गांड में दर्द हो रहा था लेकिन जो मज़ा आया उसके सामने वो दर्द कुछ नहीं था।
उसके बाद हमने अपने कपड़े पहने और रात को आने को बोलकर वो चला गया।
रात के 9 बज गए थे। सभी लोग खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे। मैंने भी खाना खा लिया था और अपने रूम में आ गया। मेरी गांड में अभी भी हल्का दर्द था तो मैंने थोड़ा तेल लगा लिया जिससे मुझे आराम महसूस हो रहा था और मुझे रात की भी तैयारी करनी थी।
मैं राजेश का इंतजार करने लगा।
रात में फिर वो पढ़ने के बहाने आया 9:30 बजे बुक के साथ आया। उसको देखते ही दिल की धड़कन बढ़ गई लेकिन घर में अभी सब जागे हुए थे तो मैं बोला- अभी कुछ देर पढ़ाई कर लेते हैं। फिर मस्ती करेंगे।
फिर हम पढ़ने लगे।
लेकिन पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। जैसे तैसे 1 घण्टे तक पढ़ाई की। जब सब सो गए तो मैंने जाकर रूम की चिटकनी लगा दी।
राजेश मेरी तरफ देख कर बोला- तेरे लिए एक गिफ्ट लाया हूँ।
मैंने पूछा- क्या है?
उसने बैग से एक बुक निकाल कर मुझे दी। वो एक सेक्स स्टोरी की किताब थी मस्तराम की। मैंने उसे खोल कर पन्ने पलटे तो उसमें ढेर सारी चुदाई और गांड मारने की स्टोरी थी।
वह बोला- हम लोग नंगे होकर बुक पढ़ेंगे।
उसने मेरे कपड़े उतार कर मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया। मैंने भी उसके कपड़े उतारे और हम दोनों नंगे हो गए।
उसके बाद हमने गांड मारने की कहानी पढ़ी। हम दोनों का लण्ड आसमान छू रहा था। बीच बीच में वो मेरा लण्ड और अंडों को सहला रहा था और मेरे होंठों को चूम रहा था। बुक पढ़ने के साथ मेरे गांड में उसका लण्ड लेने के लिए कुलबुली मची हुई थी।
उसने स्टोरी पढ़ने के बाद बुक को साइड में रख दिया और मुझसे चिपककर शरीर रगड़ने लगा। मैं भी उसका साथ देने लगा। हम अपना लण्ड एक दूसरे से रगड़ते। मेरा लण्ड का टोपा शुरू से ही हटा हुआ था। लण्ड का सुपारा एकदम गुलाबी रंग का था।
फिर वो 69 की अवस्था में आया और अपना लण्ड मेरे मुँह में दे दिया। राजेश भी मेरा लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगा। वो बीच बीच में मेरे आंड को चाटता और उनको मुँह में लेकर चूसता जिससे मैं दूसरी दुनिया में सैर करने लगता।
तब उसने दो उंगलियाँ मेरे गांड में घुसा दी और उसे अंदर बाहर करने लगा। मेरी गांड तो पहले से ढीली हो गयी थी और मैं तेल लगा कर आया था जिससे उसकी अंगुली आसानी से घुस गयी। कुछ देर बाद उसने मुझे पलटा और मेरी गांड को चाटने लगा।
उसने कहा- जानेमन, आज मैं नया स्टाइल से तेरी गांड फाड़ूँगा।
मेरी कमर को पकड़ कर उसने उठाया और डॉगी स्टाइल में बैठा दिया जिससे मेरी गांड का दरवाजा खुल गया।
फिर वह मेरी गांड को अपनी जीभ से चोदने लगा। उसकी गर्म और नरम जीभ मेरी गांड की दरार में घूम रही थी और छेद को चाट रही थी। अब मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, मैं कमर हिलाकर खूब मजा ले रहा था।
कुछ देर बाद उसने अपने लण्ड पर थूक लगाकर मेरे गांड के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। 5″ का लण्ड एक बार में ही गांड को फाड़ते हुए घुस गया। मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ।
मेरे मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाज निकली।
वो लण्ड को धीरे धीरे मेरी गांड में पेलने लगा। कुछ देर में मेरा दर्द कम हो गया और मुझे मज़ा आने लगा। मैं भी अपनी गांड हिला के उसका साथ देने लगा।
धीरे धीरे उसने स्पीड बढ़ा दी। 10 मिनट डॉगी स्टाइल में चोदने के बाद उसने मुझे पीठ के बल लेटा दिया। उसके बाद वो मेरे लण्ड और आंड को चूसने चाटने लगा। मैं अपना पूरा लण्ड उसके मुँह में पेलने लगा।
उसके बाद उसने मेरी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और मेरी गांड के छेद पर लण्ड रखा। और फिर जोरदार शॉट मारकर एक बार में ही पूरा लण्ड अंदर डाल दिया। इस बार मुझे दर्द नहीं हुआ। उसने दो तीन बार पूरा लण्ड निकाल कर पूरा एक बार में घुसेड़ा।
मुझे बहुत मज़ा आने लगा। उसने स्पीड बढ़ा दी। मैं भी कमर उचका कर उसका साथ देने लगा।
5 मिनट इसी तरह गांड मारने के बाद राजेश ने लण्ड बाहर निकाल दिया वो पसीना पसीना हो गया था।
फिर मैंने कहा- तुम लेट जाओ, अब मेरी बारी है।
राजेश लेट गया और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके होंठों को चूमने चूसने लगा। वो भी पूरा साथ दे रहा था।
फिर मैं उसकी चुचियों से खेलने लगा। हम दोनों मदहोश हो गए थे।
अब मैंने उसके लण्ड को पकड़ा और अपनी गांड के छेद पर रख कर बैठ गया। उसका पूरा लण्ड मेरी गांड में था। फिर मैं अपनी गांड को गोल गोल और आगे पीछे करने लगा। उसका लण्ड मेरे गांड में नाचने लगा।
वह मेरी कमर पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगा और साथ में जोरदार चूमाचाटी भी कर रहा था।
अचानक उसने मुझे जोर से पकड़ा और मुख से ‘आह आह’ की आवाज निकालने लगा।
मैं समझ गया कि वो झड़ रहा है, मैंने भी कमर की स्पीड बढ़ा दी और उसे जोर से पकड़ लिया। उसने अपना सारा माल मेरी गांड में ही डाल दिया। मेरा माल भी पिचकारी मारते हुए निकल गया।
कुछ देर वैसे ही मैं उसके शरीर पर पड़ा रहा। मेरी गांड उसके वीर्य से भर गयी थी।
उसके बाद हम एक दूसरे को पकड़ के सो गए।
दो तीन घण्टे बाद मेरी नींद टूटी तो देखा कि उसका लण्ड मेरे गांड में घुसा हुआ था और वो धीरे धीरे मेरा गांड बजा रहा था। मैंने भी मज़ा लिया। उसने 45 मिनट तक लगातार मेरी गांड मारी और इस बार उसने अपना माल मेरे गांड की दरार में भर दिया।
फिर सुबह में भी उसने मेरी गांड बजाई।
अब हम जब भी मिलते तो यही खेल खेलते थे। लेकिन यह मज़ा बहुत दिनों तक नहीं चला क्योंकि उन्होंने इसी शहर में दूसरा घर ले लिया था जो मेरे घर से काफी दूर था। अब हमारी मुलाकात बहुत कम हो गयी थी लेकिन हम जब भी मिलते एक दूसरे से बहुत मज़ा लेते थे।
इसी बीच हॉस्पिटल वाले भैया भी गांव से आ गए थे। अगले कहानी में बताऊंगा कि भैया का बड़ा लंड मैंने कैसे लिया।
आगे की कहानी यहा पढ़ें: मेरे गांड के आशिक़ की वापसी
1 thought on “मेरी गांड पहली बार चुदी”