bahan ki nanad sex story: नमस्कार दोस्तों, मैं अंतर्वासना पर आपका एक नया दोस्त राजेंद्र देव हूं। मैं बीस साल का हूं। मैं राजस्थान राज्य के एक छोटे से गांव से हूं।
सबसे पहले आप सभी का मेरी देसी सेक्स स्टोरी और इस साइट पर स्वागत करता हूं। दोस्तों, मैं भी आप सभी दोस्तों की तरह ही इस साइट का नियमित पाठक हूं।
कहानी शुरू करने से पहले मैं आप सभी को इस कहानी की नायिका का परिचय करवा देता हूं। इस देसी सेक्स स्टोरी की नायिका का नाम रवीना है जिसकी उम्र मेरे से एक ही साल ज्यादा इक्कीस साल है और उसका फिगर लोगों पर कयामत बरसाता है। उसकी चाल और गांड को अगर आप लोग देख लें तो मैं यकीन के साथ बोल सकता हूं कि आप बिना मुठ मारे हुए सो ही नहीं सकते हो।
यह कहानी मेरी जिंदगी की पहली सेक्सी कहानी है तो अगर मुझसे किसी भी तरह की गलती हो जाए तो मैं उसके लिए आप सभी से क्षमा प्रार्थी रहूंगा। और आप सभी से यही आशा रहेगी कि आप लोग मुझे मेरी गलतियों के बारे में बताने के साथ ही उनमें सुधार करने के बारे में भी बोलकर मेरा साथ देंगे और मुझे मेरी आगे की कहानी लिखने के लिए हिम्मत देंगे।
तो दोस्तों, आप सभी का बिना किसी प्रकार का टाइम बर्बाद करते हुए मैं आप सभी का ध्यान अपने जीवन की एक सत्य कहानी की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि यह कहानी आप सभी को जरूर पसंद आएगी।
यह कहानी सिर्फ कुछ महीने पुरानी ही है। इस कहानी की शुरुआत उस समय से हुई थी जब एक बार मैं और मेरी बहन की ननद रवीना उन्हीं के घर पर बैठकर मेरे मोबाइल फोन में मेरे व्हाट्सएप पर आए हुए जोक्स पढ़ रहे थे। और तभी अचानक मेरा और उसका ध्यान उसमें एक चुटकुले पर गया जिसमें थोड़ी सी सेक्सी बात लिखी हुई थी।
यह जोक मुझे तो पूरी समझ में आ गया था लेकिन रवीना को एक छोटी सी बात समझ नहीं आई थी।
लेकिन तभी मैंने मेरे फोन को हटा लिया था और उसने यह बात समझ ली और मेरे को इसका कारण पूछने लग गई।
उसकी बात का जवाब देने के लिए मैं पहले तो उसे मना करता रहा लेकिन जब वो बहुत देर तक नहीं मानी तो अंत में उसका मतलब उसको बताना ही पड़ा जिसका अर्थ चुम्बन था।
अब वो लाइन अभी मुझे याद नहीं है इसलिए आपको नहीं बता सकता हूं।
फिर तभी मेरे को थोड़ी शरारत सूझी और मैं उससे यह पूछने लग गया कि क्या कभी उसने किसी के साथ चुम्बन किया है।
तो उसने कहा नहीं।
और फिर उसने यही सवाल मुझसे पूछा तो मैंने कहा कि मैंने भी नहीं किया है।
फिर उसने पूछा कि क्या मेरी कोई गर्लफ्रेंड है और उसके सवाल का जवाब मैंने हां में दिया।
इस तरह से हमारी बात उस दिन यहीं पर समाप्त हो गई थी क्योंकि तभी उसकी मम्मी वहां पर आकर हम दोनों के साथ में बैठ गई थी।
अगले दिन फिर से मैं अपने फोन में व्यस्त हो गया था और उसी समय वो भी मेरे पास आ चुकी थी। लेकिन आज वो थोड़ी बदली हुई लग रही थी क्योंकि आज उसने थोड़े खुल्ले गले के कपड़े पहने हुए थे जिनमें से उसके चुच्चे थोड़े बाहर निकले हुए थे जो मेरी नियत को खराब करने का काम कर रहे थे।
और साथ ही कल वाली बातों के कारण वो मेरे साथ बातें करने में भी एकदम खुल गई थी। इस कारण आज वो मुझसे थोड़ा चिपककर बैठ गई थी और थोड़ी सेक्सी बातें करने लगने लगी थी।
लेकिन दोस्तों, मैं तो उसकी बातों से ज्यादा तो उसके चुच्चों पर ध्यान गाड़े बैठा था क्योंकि उसके चुच्चे सच में ही कयामत ढा रहे थे।
दो चार बार उसने भी यह बात नोट की थी कि मेरा ध्यान उसकी बातों से ज्यादा उसके चुच्चों पर है। लेकिन वह जानबूझकर मुझे यह अहसास दिला रही थी कि उसको इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है।
इस तरह से उस दिन का दिन खत्म हो गया और रात हो गई।
वो समय गर्मियों का था तो जैसा कि आप सभी लोग जानते ही होंगे कि गांवों में लोग गर्मियों में घरों के बाहर खुले में सोते हैं।
तो हमने भी अपनी अपनी चारपाई बाहर निकाल ली और सभी सोने लग गए।
चूंकि उसकी और मेरी चारपाई एकदम ही पास पास थी। हम दोनों ने हमारी चारपाइयों के बीच की जगह में हाथ चारपाई से नीचे लटका रखे थे।
तभी अचानक से ही उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी। जिससे मुझे यह सब अच्छा लगने लगा और बदले में मैंने भी उसके हाथ को सहलाना शुरू कर दिया।
दोस्तों, ऐसा उसने दो से तीन बार किया और उसकी आंखें भी बंद थीं तो पहले तो मुझे लगा कि शायद यह सब वो नींद में कर रही हो लेकिन मैंने भी मौके का फायदा उठाकर मेरे हाथों को उसके गालों पर पहुंचा दिया और थोड़ी हिम्मत करके उन्हें सहलाने लगा। मुझे लगा कि आज इस देसी लड़की के साथ मेरी सेक्स स्टोरी बन जाएगी।
थोड़ी देर ऐसा करने पर जब रवीना की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने मेरे हाथों को उसके चुच्चों की तरफ बढ़ाना शुरू किया और अंत में इसमें सफल हुआ। मेरे दोनों हाथ उसके नर्म मुलायम चुच्चों पर जा पहुंचे जिन्हें छूते ही मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।
उसके गर्म और नरम मांस की स्पर्श से मेरी उंगलियां कांप उठीं। मैंने धीरे से अपनी हथेलियों को उसके चुच्चों पर फैलाया और उनकी पूरी गोलाई को महसूस किया। वे भारी, नरम और लचीले थे। उनकी गर्माहट मेरी हथेलियों में समा रही थी।
धीरे धीरे मैंने उसके चुच्चों को दबाना शुरू किया किंतु तभी रवीना ने आंखें खोल दी जिन्हें देखकर एकदम से मैं घबरा गया और मैंने मेरे हाथों को उसके चुच्चों पर से तुरंत हटा लिया।
लेकिन तभी उसने मेरे हाथों को पकड़कर फिर से अपने चुच्चों पर रख दिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए जिसमें हम दोनों एक दूसरे के होंठों को दस मिनट तक चूसते रहे और एक दूसरे के होंठों के रस को हम पीने लगे।
उसके नरम होंठ मेरे होंठों पर दब रहे थे। हम दोनों की सांसें एक दूसरे में मिल रही थीं। मैंने उसकी निचली होंठ को चूस लिया और फिर ऊपरी को। हमारी जीभें एक दूसरे से टकराईं और गीले रस का आदान प्रदान होने लगा। उसके मुंह का मीठा स्वाद मुझे और उत्तेजित कर रहा था।
फिर रवीना के होंठों के रस को पीते हुए ही मैंने मेरा एक हाथ उसके चुच्चों से हटाकर उसकी चूत की तरफ बढ़ा दिया और सीधा उसकी सलवार में ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी पैंटी सरकाकर उसकी चूत को रगड़ने लगा जिससे वो धीरे धीरे आह उह अहह की सिसकारियां भरने लगी।
मेरी उंगलियां उसकी गर्म और नम चूत की फांकों को छू रही थीं। मैंने धीरे से उसकी चूत को रगड़ा तो उसकी सिसकारियां तेज हो गईं। “आहह… उहह…” वह धीमी आवाज में कराह रही थी। उसकी चूत से निकलता गर्म और चिपचिपा रस मेरी उंगलियों को गीला कर रहा था।
कुछ देर रवीना के चुच्चे दबाने के बाद मैंने उसको धीरे से उसके घर के अंदर जाने को बोला और रवीना धीरे से बिना आवाज किए हुए ही अंदर चली गई।
और फिर उसके पीछे से ही मैं भी उनके घर में चला गया।
अंदर जाते ही भूखे शेर की तरह मैं उस पर टूट पड़ा, उसको जगह जगह पर चूमने और काटने लगा। जिससे वो गर्म हो गई और तरह तरह उम्म्ह अहह हय ओह हह की आवाजें निकालने लगी।
मैंने उसके गले पर, कानों पर और फिर उसके नंगे चुच्चों पर गहरे किस किए। उसके स्तनों को चूसते हुए मैंने हल्के से काट भी लिया। वह तड़प उठी और “अहह… ओहह… राज… धीरे…” जैसी कराह भरने लगी। उसका शरीर गर्म होकर कांप रहा था।
जिससे मैं और भी उत्तेजित हो गया और उसको खाने लग गया और उसकी चूत को चाटते हुए काटने भी लग गया।
मैं उसके पैरों के बीच लेट गया। उसकी चूत को अपनी जीभ से पूरी तरह चाटा। उसका मीठा और गर्म रस मेरी जीभ पर फैल रहा था। मैंने उसकी छोटी सी गांठ को चूस लिया तो वह जोर से कराह उठी। “उम्म्ह… आहह… हां… वहां…” उसकी उंगलियां मेरे बालों में खिंच गईं।
इस तरह से दस मिनट बाद ही रवीना का शरीर अकड़ने लग गया और थोड़ी ही देर में वो मेरे मुंह में ही झड़ गई और ऐसा करते समय उसने अपने नाखून भी मेरी पीठ में चुभा दिए। दूसरी तरफ उसने भी मेरे लंड का पानी निकाल दिया था जो मैंने उसके पेट और चुच्चों पर डाल दिया।
उसके झड़ते समय उसका पूरा शरीर सिहर उठा। गर्म रस की धार मेरे मुंह में आई जिसे मैंने चखा। उसकी आंखें बंद थीं और चेहरा आनंद से लाल हो रहा था। मेरे लंड से भी सफेद रस फूट पड़ा जो मैंने उसके पेट पर, उसके भारी चुच्चों पर फैला दिया।
करीब दस मिनट बाद हम दोनों फिर से गर्म हो गए और मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने इस बार चूत की गर्मी और चुदने की प्यास के साथ ही अपने घर वालों के नींद से उठ जाने के डर के कारण मेरे छह इंच लंबे लंड को सीधे अपनी चूत के मुंह पर लगा लिया।
तभी मैंने उसकी चूत में एक जोरदार धक्के से उसकी सील पैक चूत की सील तोड़ दी।
मेरा मोटा और सख्त लंड एक ही झटके में उसकी तंग और कुंवारी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। इस तेज धक्के से उसकी चूत से थोड़ा सा गर्म खून बहने लगा जो मेरे लंड को गीला कर रहा था। दर्द की तीव्र लहर से रवीना का पूरा शरीर अकड़ गया।
इससे उसकी चूत से थोड़ा खून बहने लग गया और इस धक्के से हुए दर्द के कारण वह थोड़ा चिल्लाने लगी। पर मैंने अपने होंठों से उसकी आवाज को दबा दिया।
वह “अह्ह्ह… आह्ह… दर्द हो रहा है…” जैसे कराह रही थी लेकिन मैंने अपने मुंह से उसके होंठों को चूस लिया और उसकी चीख को दबा दिया। मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर घुसकर उसके रस को पी रही थी। धीरे धीरे उसका दर्द कम होने लगा और उसकी सिसकारियां आह उह में बदलने लगीं।
थोड़ी ही देर में वह मेरे लंड को मजे से अपनी चूत के अंदर लेने लग गई और उसका पूरा मजा लेने लगी।
अब रवीना की चूत पूरी तरह गीली और चिकनी हो चुकी थी। वह अपनी कमर को ऊपर नीचे हिलाने लगी और मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर पूरा पूरा लेने लगी। हर धक्के पर उसके नरम चुच्चे ऊपर नीचे उछल रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके चुच्चे को जोर से दबाया और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़कर तेज तेज ठोके मारने लगा। “उम्म्ह… आहह… और जोर से… राज… हां…” वह फुसफुसाते हुए कराह रही थी। उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी। गर्म और चिपचिपा रस हर बार बाहर निकल रहा था।
दोस्तों, इस प्रकार हमारी यह चुदाई करीब बीस मिनट तक चली और बीस मिनट बाद हम दोनों एक साथ ही उसकी चूत में झड़ गए।
हम दोनों की सांसें तेज हो गई थीं। मेरे लंड के हर धक्के के साथ कमरे में चूत की चिकनी आवाजें गूंज रही थीं। आखिरकार रवीना का शरीर एक बार फिर से अकड़ गया। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को जोर से जकड़ लीं। उसी पल मैंने भी अपना पूरा गर्म वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसकी चूत से हमारा मिश्रित रस बाहर निकल रहा था।
इसके बाद थोड़ी देर तक हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे और फिर कुछ देर बाद हमने अपने अपने कपड़े पहने और वापस आकर अपनी अपनी जगह पर सो गए।
हम दोनों पसीने से भीगे शरीरों को एक दूसरे की बाहों में लपेटे लेटे रहे। रवीना की सांसें अभी भी भारी थीं। उसके नरम चुच्चे मेरी छाती पर दबे हुए थे और मेरे हाथ उसकी कमर पर घूम रहे थे। हम थोड़ी देर तक चुपचाप एक दूसरे को सहलाते रहे। फिर हमने अपने बिखरे पड़े कपड़े पहने, सलवार के नाड़े कसे और चुपके से बाहर निकलकर अपनी चारपाइयों पर लेट गए।
इस घटना के बाद मैंने रवीना को कई बार चोदा। सच कहूं तो उसको भी मेरे लंड की आदत लग गई थी। वह अब खुद ही मौके ढूंढकर मुझसे चुदवा लेती थी। कभी तो हम खेत की सुनसान जगह में घुस जाते। मैं उसकी सलवार उतारकर उसे घास पर लिटा देता और उसके ऊपर चढ़कर उसके चुच्चों को चूसता, उसकी चूत को अपनी उंगलियों से रगड़ता और फिर अपना सख्त लंड उसकी गीली चूत में घुसाकर तेज तेज धक्के मारता। कभी सरकारी स्कूल की पुरानी इमारत के पीछे वाले कमरे में ले जाकर दीवार से सटाकर उसे खड़े खड़े चोदता। वह हर बार अपनी कमर हिलाकर मेरा लंड गहराई तक ले लेती और “आहह… राज… और जोर से… हां… फाड़ दो मेरी चूत…” जैसी सिसकारियां भरती।
एक बार तो एक सरकारी स्कूल के टीचर ने हमें पकड़ लिया था। हम स्कूल के पीछे वाले कमरे में रवीना को झुकाकर चोद रहे थे। मेरे लंड के जोरदार ठोकों से उसकी चूत से चिकनी आवाजें निकल रही थीं। तभी टीचर अंदर आ गया। बदले में उसने भी रवीना की चूत मांगी। पहले तो हमने मना कर दिया लेकिन बाद में मजबूरी में रवीना मान गई।
और उस दिन रवीना ने पहली बार दो लंड एक साथ लिया। टीचर ने बहुत खतरनाक चुदाई की रवीना की। उसने पहले उसे मुंह में लंड दिया और फिर दोनों ने मिलकर उसे चारों तरफ से चोदा। रवीना पहले दर्द और शर्म से कराह रही थी लेकिन बाद में उसे जबरदस्त मजा आने लगा।
यह पूरी कहानी अगले भाग में बताऊंगा।
दोस्तों, मैं उम्मीद करता हूं कि आप सभी को मेरी यह पहली देसी सेक्स स्टोरी पसंद आई होगी।
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