दो चुदक्कड़ बहनों को गुड़ चना खाकर चोदा

Kuwara Ldka/Virgin Boy sex story: हाय मित्रो, मैं जिग्नेश सिंह हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे सभी सेक्स कहानियां बहुत पसंद हैं। आज मैं आप लोगों से अपनी आपबीती शेयर करना चाहता हूँ।

मैं अभी ४३ साल का हूँ। आजकल मैं दिल्ली में रहता हूँ, लेकिन मेरा पैतृक घर बिहार के एक छोटे से गांव में है। मैं बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज था। उस समय आजकल की तरह मनोरंजन के आधुनिक साधन नहीं थे, लेकिन लोगों में प्यार और सहयोग की भावना खूब थी। हम लोग भी खेलने के लिए एक दूसरे के घर बिना किसी रोक-टोक के चले जाते थे।

मेरी एक बड़ी बहन थी, जो पढ़ाई के साथ घर के कामों में मां की मदद करती थी। पिताजी शहर में रहकर नौकरी करते थे। घर में बाकी लोग भी थे, तो पापा के न रहने की कमी नहीं खलती थी।

मेरे घर के पास एक परिवार रहता था, जिसमें दो लड़कियां और एक लड़का रहता था। उनके पिता किसान थे और मां दूसरे के घरों में काम करती थी।

मेरी उम्र उस समय लगभग १९ साल हुई ही थी। उन दो लड़कियों की उम्र १९ और २० साल थी। वे गरीबी के कारण पढ़ाई नहीं कर पा रही थीं, लेकिन देखने में बेहद मस्त थीं।

बड़ी वाली का नाम प्रेमा और छोटी बहन का नाम नीमा था। उस समय गांवों में ब्रा या पैंटी पहनने का चलन नहीं था, तो ये दोनों कोई साड़ी या सूट पहन लेती थीं जो अक्सर किसी का दिया हुआ होता था। इसलिए कभी ढीला होता तो कभी चुस्त, जिससे उनका भरा-भरा शरीर और भी आकर्षक लगता था।

उन दोनों का फिगर उम्र के मुकाबले काफी भरा हुआ और मस्त था। चलते वक्त उन दोनों की चुचियां और गांड ऐसे हिलते थे कि किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। दोनों बड़ी ही तेज और चुस्त थीं।

एक दिन मैं स्कूल से वापस आया। दूसरे दिन रविवार होने की वजह से मैं खाली था। मैं प्रेमा के घर उसके छोटे भाई के साथ खेलने चला गया। जब मैं वहां पहुंचा, तो उनकी मां बाहर काम पर गई थीं और पिता किसी के खेत में काम करने गए थे। मतलब घर पूरी तरह खाली लग रहा था।

मैं छोटे भाई को खोजते हुए घर में घुस गया। मुझे वह दिखाई नहीं दिया, तो मैं वापस आने लगा। जब एक कमरे के बगल से गुजरा तो भीतर से “उंह आह..” की और हंसने की आवाजें आ रही थीं। मेरे पैर वहीं रुक गए। मैं कमरे में झांकने की कोशिश करने लगा।

किस्मत से मुझे एक बड़ा सा छेद दिख गया। जब मैंने छेद में से देखा तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। दोनों बहनें आपस में बिना कपड़ों के गुथी हुई थीं। बड़ी वाली प्रेमा छोटी बहन के बड़े-बड़े चूचों को चूस रही थी।

उनको इस हालत में देखकर मेरे पैर कांपने लगे, लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था। पहली बार मुझे अपने लंड में तनाव महसूस होने लगा। मेरा हाथ अपने आप अपने लंड पर चला गया। मैं धीरे-धीरे अपना लंड हिलाने लगा।

थोड़ी देर में छोटी नीमा उठी और अपनी बड़ी बहन प्रेमा की चूत चूसने लगी। पहली बार मैंने अपनी जिंदगी में चूत देखी थी। नीमा ने प्रेमा की जांघों को फैलाकर अपनी गर्म जीभ से उसकी गुलाबी चूत की फांकों को चाटना शुरू किया। प्रेमा की चूत से पारदर्शी रस टपक रहा था, जो नीमा की जीभ और होंठों पर चिपक रहा था। नीमा जोर-जोर से चूस रही थी, जिससे चूच-चूच की भारी आवाजें निकल रही थीं।

प्रेमा “उह आह..” करने लगी। उसकी सांसें तेज हो गई थीं और उसकी आंखें बंद थीं। मेरे लंड में भी तनाव बहुत ज्यादा था। थोड़ी देर में मुझे अपने लंड से कुछ निकलता हुआ महसूस हुआ। वो तो अच्छा था कि मैंने अपना लंड बाहर निकाल रखा था, नहीं तो पैंट खराब हो जाता।

फिर एक गाढ़ा लिसलिसा सा पानी निकला, जिसे मुझे बाद में पता चला कि मुठ कहते हैं। मेरी तेज सांसों की आवाज सुनकर वो दोनों हड़बड़ा गईं और बड़ी बहन उठकर कपड़े पहनने लगीं।

उसी बड़ी बहन प्रेमा ने बाहर आकर मुझे पकड़ लिया और भीतर ले गई।

उसने पूछा, “क्या देख रहे थे?” मैं रोनी सी सूरत बनाकर बोला, “मैंने कुछ नहीं देखा।” उसने मेरे खड़े लंड की ओर इशारा करके पूछा, “ये क्यों खड़ा है?” मैंने कहा, “मुझे नहीं मालूम।” तो उसने कहा, “कोई बात नहीं। लेकिन तुमने हमें नंगी देखा है, तो अब तुम्हें भी पूरे कपड़े उतारने होंगे।”

मैं कुछ नहीं बोला। प्रेमा मेरे कपड़े उतारने लगी। उसने मेरी शर्ट निकाली, फिर पैंट और अंडरवियर खींचकर नीचे कर दिया। अब मैं पूरी तरह नंगा खड़ा था। दोनों बहनें मेरे खड़े और मोटे लंड को देखकर हैरान रह गईं। मेरा लंड पूरी ताकत से तनकर ऊपर की ओर मुड़ रहा था और उसकी नोक से पारदर्शी रस टपक रहा था।

छोटी बहन नीमा बोली, “प्रेमा, हम तो बेकार में अपनी जवानी बर्बाद कर रहे थे। इतना मस्त लंड तो हमारे पड़ोस में ही है।” ये कहते हुए वो मेरे पास आई और मेरे लंड को अपने गर्म हाथों में पकड़ लिया। फिर उसने लंड की नोक को चूमकर मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। उसकी गर्म और नम जीभ लंड के चारों ओर लपेट रही थी। इसी बीच बड़ी बहन प्रेमा ने अपनी भारी ३४ साइज की चुचियां मेरे मुंह पर रख दीं और बोली, “पीओ इन्हें।” मैं मस्ती में था, इसलिए उसकी नरम और गर्म चुचियों को चूसने और दबाने लगा। साथ ही मैंने अपने दोनों हाथों से छोटी बहन नीमा की मुलायम चुचियां जोर-जोर से दबानी शुरू कर दीं।

कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा। फिर बड़ी बहन प्रेमा ने कहा, “चल छोड़ इसको… मुझे इसकी जवानी का उद्घाटन करना है।” उसने मुझे अपनी चूत पर मुंह रखकर चूत चाटने को कहा। मैंने झुककर वैसा ही किया, लेकिन मुझे अच्छा नहीं लगा और मैं हटने लगा। तो वो बोली, “चुपचाप चूत चाट… नहीं तो तेरी शिकायत कर दूंगी कि तुम मेरे साथ जोर-जबरदस्ती कर रहे थे।”

उसकी शिकायत के डर से मेरी गांड फट गई। मैंने उसकी बात मान ली और उसकी चूत चाटता रहा। वो खटिया पर लेट गई थी। अब स्थिति यह थी कि बड़ी बहन खटिया पर चित लेटी हुई अपनी चूत चटवा रही थी। मैं नीचे खड़ा होकर उसकी चूत में मुंह लगाए हुए था। उधर छोटी बहन नीमा घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को चूस रही थी। नीमा हंसते हुए मेरा लंड पूरी तरह मुंह में ले-लेकर चूस रही थी।

कुछ देर बाद बड़ी बहन प्रेमा खटिया से उठी और मुझे जमीन पर लिटा दिया। फिर वो मेरे ऊपर आई और मेरे लंड को अपनी चूत के मुहाने पर रखकर धीरे-धीरे बैठने लगी।

मुझे लंड में दर्द हो रहा था, लेकिन साथ में बहुत मजा भी आ रहा था। मैंने उसकी भारी चुचियां दोनों हाथों से पकड़ ली थीं और उन्हें जोर-जोर से दबा रहा था। प्रेमा ने अपनी मस्त गांड को नीचे की ओर दबाया। उसकी गर्म और भीगी चूत धीरे-धीरे मेरे मोटे लंड को निगलने लगी।

उसने धीरे-धीरे अपनी मस्त गांड को मेरे लंड पर टिका दिया। उसकी चूत में मेरा पूरा लंड घुस गया था। एक-दो पल उसने अपनी गांड को हिलाकर मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर अच्छे से एडजस्ट किया। फिर वो अपनी चूत को मेरे लंड पर जोर-जोर से पटकने लगी। हर बार जब वो नीचे बैठती, तो उसकी गांड मेरी जांघों से टकराती और चुट-चुट की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। उसकी चूत बहुत गर्म और सिकुड़ती हुई थी, जो मेरे लंड को अच्छे से दबा रही थी।

ये देख उसकी छोटी बहन नीमा ने भी अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी, जिसे मैं चाटने लगा। मेरी जीभ उसकी गुलाबी चूत की फांकों के बीच घुस रही थी और उसके रस को चूस रहा था।

बड़ी को चूत चुदवाने में इतना मजा आ रहा था कि वो शोर मचाने लगी, “उम्म्ह… आह्ह… हय… याह… मेरा शोना बाबू… बड़ा मजा आ रहा है… तुम हमें ऐसे ही खुश करते रहा करो।” उसकी सांसें तेज हो गई थीं और उसका पूरा शरीर पसीने से भीग रहा था।

मैं उसकी चूत की गर्मी से लंड की सिकाई होती महसूस कर रहा था। उसकी चूत के अंदर का गर्म रस मेरे लंड पर बह रहा था। फिर वो मेरी छाती पर झुकी और मेरे सीने पर अपने भारी मम्मों को रगड़ते हुए मेरे लंड को चोदने में लगी रही। उसकी गांड तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी और हर झटके के साथ मुझे अंदर तक गर्मी महसूस हो रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वो अकड़ने लगी और मेरे ऊपर ही गिर पड़ी। लेकिन मेरा नहीं हुआ था… तो मैं लंड लिए खड़ा हो गया।

तभी छोटी बहन नीमा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और अपनी चूत में लंड लेकर चोदने को बोली। मैंने वैसा ही किया। मैं उसकी चूत में जोर-जोर से शंटिंग करने लगा। वो खुद भी नीचे से अपनी गांड ऊपर उठाकर चुदने लगी। मैंने इस बार छोटी के मम्मे चूसते हुए उसे खूब चोदा। वो बड़ी तबियत से अपनी गांड उठा रही थी, जिससे मेरा मोटा लंड उसकी चूत के सबसे अंदर तक बार-बार धक्के मार रहा था। उसकी चूत पूरी तरह भीगकर लिसलिसा हो गई थी और चुदाई की चुट-चुट की आवाजें तेज हो रही थीं।

वो अपनी बड़ी बहन से बोली, “जीजी, इसका मोटा लंड तो बड़ी मस्ती दे रहा है। पूरा अंदर तक घुस रहा है और मेरी चूत को फाड़ रहा है।” उसकी बहन प्रेमा भी पास में आ गई और मेरे बाल पकड़कर मेरे सर को उठाकर अपने मम्मों में लगाते हुए बोली, “ले राजा, इन बड़े-बड़े थनों को चूस। दूध पी ले… ताकत आ जाएगी और लंड और मजबूत हो जाएगा।”

ये सुनकर लंड के नीचे दबी छोटी हंसने लगी, “जीजी, अभी तुम्हारे थनों में दूध कहां से निकलेगा। पहले इसकी मोटी चूत में रस डलवाकर बच्चा तो पैदा करवा लो। मेरी चूत तो अभी इसके लंड से फटने वाली है।” बड़ी भी हंसने लगी।

मैंने बड़ी के दोनों मम्मों को बारी-बारी से खूब चूसा। बड़ी के मम्मों से दूध तो नहीं निकल रहा था… पर मजा बहुत आ रहा था।

कुछ देर बाद मैंने भी स्पीड पकड़ ली और जोर-जोर से चूत चोदने लगा। धकापेल चुदाई के दौरान छोटी दो बार झड़ चुकी थी… लेकिन मैंने बिल्कुल स्पीड कम नहीं की। मैं उसकी चूत में तेज-तेज धक्के मार रहा था, जिससे उसकी चूत का रस बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बह रहा था।

फिर १५ मिनट बाद मैं भी झड़ने वाला था, तो मैं उसके अंदर ही झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया। चूंकि ये मेरा पहली बार था, तो मैं बहुत थक गया था। मेरे लंड से गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर भर गया था।

इसके बाद मैंने जाने के लिए अपने कपड़े उठाए, तो बड़ी ने मुझे पकड़ लिया। वो कहने लगी, “अभी किधर चले?” मैंने कहा, “मुझे भूख लग रही है।” तो वो बोली, “मैं तुम्हारे लिए गुड़ चना ले आती हूँ।”

वो जल्दी से गुड़ चना ले आई। हम तीनों ने गुड़ चना खाकर अपनी थकान दूर की। फिर से चुदाई का दौर शुरू हो गया। मैं शाम तक उन दोनों के साथ ही रहा। मैंने दोनों को तीन-तीन बार चोदा था। दोनों बहनों की चूतें मेरे वीर्य से भरी हुई थीं।

चुदाई की मस्ती के बाद उन्होंने खुद भी अपने कपड़े पहने और मुझे भी कपड़े पहनकर जाने को बोला। बड़ी ने बोला, “अगर किसी को नहीं बताओगे, तो हम तीनों लोग ऐसे ही खेल खेलेंगे।” मैंने हामी भर दी।

दोस्तो, घर आकर मैं सो गया। फिर रात को लगभग आठ बजे मेरी मां ने मुझे उठाया और खाना खिलाया।

उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता था… हम तीनों चुदाई का यह खेल खेल लेते थे। मेरे साथ उन दोनों ने एक लौंडे को और भी सैट कर लिया था। अब हम चारों ही सामूहिक चुदाई का मजा लेने लगे थे। मैंने उन दोनों की गांड भी मारी थी। वे दोनों इतनी बड़ी चुदक्कड़ थीं कि कुछ ही समय बाद अपनी गांड और चूत में एक साथ दो लंड लेने लगी थीं। दोनों बहनें लंड की दीवानी हो चुकी थीं और बार-बार चोदने को मचलती रहती थीं।

दूसरा लड़का शराब पीने का शौकीन था… तो एक बार उन दोनों लड़कियों के मां-बाप बाहर गांव गए थे। उस पूरी रात हम चारों ने शराब और बीड़ी पीकर चुदाई का मजा लिया। हमने दोनों बहनों को नंगी करके बारी-बारी से चोदा। उनकी चूत और गांड दोनों में लंड डालकर खूब ठोका। कमरे में चुदाई की आवाजें, कराहने की आवाजें और गंदी बातें पूरी रात गूंजती रहीं।

इसके बाद उन्होंने गांव की तीन-चार लड़कियों और भाभियों को भी मेरे लंड से चुदवाया था। वे सब मेरे मोटे लंड की तारीफ करतीं और बार-बार चोदने आतीं।

बड़ा होने पर मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चला आया। लेकिन चूत का जो चस्का उस उम्र में लगा था, वो आज तक नहीं छूटा।

अब मैं शादीशुदा हूं। पत्नी के साथ खुश हूं। लेकिन कोई नई चूत देखते ही लंड दहाड़ मारने लगता है। मैं भी उसे रोकता नहीं हूं, मैं वक्त बेवक्त किसी न किसी को सैट करके चुदाई करता रहता हूं।

उस वक्त तो मुझे लंड की लंबाई मोटाई का कुछ पता ही नहीं था। मैं समझता था कि सभी के लंड ऐसे ही होते होंगे। क्योंकि गांव में उन दोनों बहनों की चुदाई में मेरे साथ वाले लौंडे का लंड भी मेरे जितना ही था। लेकिन जब शहर की लड़कियां और भाभियां चोदीं, तब मालूम हुआ कि मेरे देसी लंड की साइज औसत लंड से काफी बड़ी थी, जिस वजह से मेरा लंड बड़ा लोकप्रिय हो गया था।

मैंने अब तक जितनी भी चूत चोदी हैं, उन लोगों की गोपनीयता का ध्यान भी रखा है। इसी कारण से वो सब मेरी इस बात से खुश रहती हैं और उन्हीं के माध्यम से मुझे अगली चूत का इंतजाम हो जाता है। आज तक मैंने जिनकी भी अपने लंबे मोटे लंड से चुदाई की है उन्होंने बाद में खुलकर मुझसे चुदाई करवाई है।

दोस्तो, ये मेरी पहली सामूहिक सेक्स कहानी थी इसलिए गलतियों को माफ करना। आगे की और कुछ मजेदार और सेक्सी कहानियों के साथ मैं फिर लौटूंगा। आपकी मेल का इंतजार रहेगा।

जिग्नेश सिंह

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