हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रंजू श्रीवास्तव है और मैं एक हाउसवाइफ हूँ। मेरी उम्र 34 साल है। मेरी साइज़ 36-32-38 की है। मेरा बदन पूरा भरा हुआ है। मेरे घर में मैं और मेरे नामर्द पति तथा मेरे दो बच्चे रहते हैं। मेरे पति एक प्राइवेट जॉब करते हैं। वो मुझे बिस्तर में खुश नहीं कर पाते हैं।
एक दिन की बात है। मेरे पति ऑफिस गए थे और मैं नहाकर कपड़े ही पहन रही थी कि इतने में एक सब्जी वाला बाहर मेरे दरवाजे पर आवाज़ दे रहा था। “मैडम सब्जी ले लो … हरी ताज़ी सब्जी है।”
मैंने साड़ी पहनकर बाहर जाकर देखा तो एक बड़ा मस्त मर्द सब्जी बेच रहा था। इसे मैंने पहले कभी अपने एरिया में नहीं देखा था। शायद नया सब्जी वाला था। मैंने इधर-उधर देखकर उसको अपने पास बुलाया।
वो करीब आया तो मैंने पूछा, “भैया, आपकी उसका क्या रेट है?” मेरी इस दो अर्थी बात सुनकर वो मुझे ध्यान से देखने लगा। वो मैडम से सीधे भाभी पर आ गया और बोला, “भाभी जी, आपके लिए तो सब रेट कम ही हैं। आप तो बस बोलो कि क्या लोगी।”
मैंने इठलाते हुए अपने चूचे हिलाए और बोला, “बड़े बड़े से वो दे दो।” वो बोला, “क्या दे दूँ बड़े बड़े से?” मैंने कहा, “आलू दे दो … दो किलो।”
उसने भी अपनी लुंगी में अपना लंड जरा सा सहलाया और मेरी तरफ देखता हुआ बोला, “कैसे लोगी भाभी जी?” मैंने मन में सोचा कि कह दूँ कि जैसे तुम देना चाहो। फिर मैंने पूछा, “कैसे लोगी से … तुम्हारा क्या मतलब है भैया?”
वो बोला, “मतलब कुछ डलिया वगैरह में लोगी या मैं थैली में दे दूँ?” मैंने कहा, “थैली में ही दे दो।”
उसने आलू तौल दिए। मैंने उससे आलू ले लिए। उससे आलू लेते वक्त मैं जरा झुक गई, जिससे उसको मेरे गहरे गले वाले ब्लाउज में से मेरी मस्त चूचियों की भरपूर झलक दिख गई। मेरी निगाह उसकी लुंगी पर थी। उसकी लुंगी ने उठना शुरू कर दिया था।
फिर मैंने उसको ध्यान से देखा। वो एक 40 साल का हट्टा-कट्टा पहलवान टाइप का मर्द दिख रहा था।
उससे सब्जी लेकर मैं घर के अन्दर जाने लगी, तो वो मुझसे बोला, “भाभी जी, पैसे?” मैंने कहा, “भैया अभी अन्दर से लाकर देती हूँ।” वो बोला, “ठीक है।”
मैं अन्दर जाने लगी, तभी मैंने पलट कर देखा। वो मेरे पिछवाड़े को बड़ी मस्त निगाहों से देख रहा था। मैं मन ही मन मुस्कुरा दी और अपनी गांड हिलाते हुए अन्दर चली गई।
जब मैं वापस आई, तो मैंने देखा कि उसकी कामुक नज़र मेरे गदराए हुए जिस्म पर टिकी थीं। वो मेरे मम्मों को बड़ी ध्यान से देख रहा था। मैंने उसको पैसे दिए और अन्दर जाने के लिए मुड़ी।
उसी समय न जाने कैसे मेरे पैर में मोच आ गई और मैं वहीं गिर पड़ी। मुझे गिरता देखकर वो सब्जी वाला मुझे उठाने लगा। मैंने उसको मना किया, लेकिन वो नहीं माना। वो मुझे उठाकर घर के अन्दर ले आया।
जब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया हुआ था, उस वक्त मैंने महसूस किया था कि उसका फौलादी लंड मेरी गांड के ऊपरी हिस्से में मतलब मेरी कमर को टच कर रहा है। उसने मुझे कसके पकड़ा हुआ था।
वो मुझे बेड के नजदीक लाया और मुझे बड़े हौले से बेड पर लिटा दिया। फिर वो मुझसे बोला, “भाभी जी … मूव किधर रखी है, बता दीजिए … मैं आपके पैर में मूव लगा देता हूँ।”
मैंने उससे बोला, “तुम रहने दो … तुम बाहर चले जाओ, तुम्हारा ठेला बाहर खड़ा है … मैं अपने आप मूव लगा लूँगी।” वो बोला, “नहीं … आपको दर्द है … मैं आपको इस हालत में ऐसे छोड़कर नहीं जा सकता … मेरे ठेले की चिंता आप न करें।”
मेरे कई बार मना करने के बाद भी वो खुद से सामने की टेबल पर रखी मूव उठा लाया और मेरी साड़ी को थोड़ा ऊपर करके पैर में मूव लगाने लगा। उसके हाथों में बड़ी नफासत थी। मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा।
उसके हाथों से थोड़ी ही देर में मुझे आराम मिल गया और मैं पैर फैलाकर लेट गई। वो अब और भी अच्छे से मेरे पैर की मालिश करने लगा।
थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि वो साड़ी को कुछ और ऊपर कर रहा था। अब वो अपना हाथ मेरी जांघों तक ले जा रहा था। मैं आंखें खोलकर उठकर बैठ गई।
पहले तो मैंने सोचा कि शायद ये मालिश से भी कुछ आगे बढ़ेगा, तो हो सकता है कि आज मुझे शांति मिल जाए। मैं उसकी मर्दाना छाती देखकर बड़ी चुदासी हुई जा रही थी। साथ ही मेरा दिमाग काम करने लगा था कि कैसे भी करके इसे फंसाना ही है। ये मुझे मस्त चोद सकता है।
मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि अगर आज ये सैट हो गया तो इसके लंड की चुदाई से मेरी चुत की आग शांत हो जाएगी जो आज तक मेरे पति नहीं कर पाए थे। मैंने उससे कहा, “यह क्या कर रहे हो तुम?”
वो बोला, “भाभी जी … मैं मालिश कर रहा हूँ।” मैं बोली, “मोच तो नीचे वाले हिस्से में आई थी, तो तुम ऊपर क्यों मालिश कर रहे हो?”
वो बोला, “अरे मोच को मालिश करने के बाद पूरे पैर को अच्छे से मालिश करना पड़ता है … नहीं तो दर्द नहीं जाएगा।” मैं बोली, “तुम रहने दो … अब जाओ। मुझे लगता है कि तुम कुछ ज्यादा ही मुझे सहला रहे हो।”
वो बोला, “नहीं भाभी जी, मैं आपकी मालिश कर रहा हूँ।” मैंने उसे उकसाया, “कहीं तुम मुझे अकेली पाकर मेरे साथ गलत काम तो नहीं कर दोगे।”
ये कहते हुए मैंने उठने की कोशिश की और अपना पल्लू ढलक जाने दिया। मेरे गहरे गले के ब्लाउज से उसको मेरी अधनंगी चूचियां गर्म करने लगी थीं। मैं देख रही थी कि उसका लंड फूलने लगा था।
वो मेरी चूचियों की तरफ देखकर बोला, “अगर आप मुझसे कुछ गलत काम करने के लिए कहेंगी, तो मैं जरूर कर दूंगा। वैसे आप अपनी गेंदें दिखाकर मुझे भड़का रही हैं।”
मैंने पूछा, “गेंदें मतलब?” वो लंड सहलाकर मुझसे बोला, “भाभी जी गेंदें नहीं समझती हो। मैं आपके दूधों की बात कर रहा हूँ।”
यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे सीने से लगा कर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया। साथ ही मेरी साड़ी भी खींच दी थी। हालांकि मेरी साड़ी अब भी मेरे बदन से लिपटी हुई थी। मैं समझ गई कि लंड काबू में आ गया है। अब मैंने नाटक करना शुरू किया।
“ये क्या कर रहे हो तुम … इधर से चले जाओ तुम!”
वो बोला, “एक तो तेरे लिए इतनी मेहनत की और बिना कुछ दिए बोल रही हो कि अब जाओ।”
मैं घबरा कर बोली, “ये तुम क्या बोल रहे हो … तुम तुम्हारा दिमाग खराब है क्या?”
वो बोला, “हां तुझे देखकर मेरा दिमाग और हालत दोनों खराब हो गए हैं। अब तुझे पहले जी भर कर चोदूंगा, फिर मेरा दिमाग सही होगा।”
मैंने उसको भगाने की कोशिश की नौटंकी की लेकिन मैं नाकामयाब रही। वो मेरे साथ और पास आ गया। पहले तो उसने मेरी साड़ी पूरी तरह से खींचकर मेरे जिस्म से अलग कर दी। मैं उसके सामने रोने का ड्रामा कर रही थी, “प्लीज मुझे छोड़ दो।”
लेकिन उसकी आंखों में अलग ही चमक थी। वो मुझको देखकर बोला, “साली तुम चुदासी औरतें ऐसे गांड मटका-मटका कर चलती हो कि हम लोगों का लंड खड़ा हो जाता है। जब चोदने की बारी आती है तो साली नखरे दिखाने लगती हो। एकदम चुप रह साली रंडी। आज तेरी चुत का मैं भोसड़ा बना दूंगा। आज अपने फौलादी लंड से तेरी चुत के चिथड़े उड़ा दूंगा। तू बस आज देखती जा।”
उसने मेरी साड़ी तो खींच ही दी थी। अब मैं उसके सामने ब्लाउज पेटीकोट में रह गई थी।
मुझे इस हालत में देखकर वो अपना मोटा लौड़ा सहलाते हुए बोला, “अरे साली कितनी बड़ी रांड लग रही है तू। तेरी ये भारी-भारी चुचियां कितनी बड़ी हैं। आज मैं इनका पूरा दूध पी जाऊंगा।”
मैं उसके सामने बार-बार छोड़ देने की कहती रही, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा था। उसने एक जोरदार झटके में मेरा साया भी फाड़कर अलग कर दिया। अगले झपट्टे में मेरा ब्लाउज भी मेरी भरी हुई चुचियों का साथ छोड़ चुका था। अब मैं उसके सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में लगभग नंगी खड़ी थी और उसे मना कर रही थी।
फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार फेंके और मेरे सामने पूरा नंगा हो गया। उसका लंड देखकर मैं हैरान रह गई। मैंने आज तक अपने जीवन में कभी इतना मोटा और लंबा लंड देखा या कल्पना भी नहीं की थी। उसका लंड पूरे आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा था।
मुझे तो ऐसा लगा कि ये तो गधे का लंड लगवाकर पैदा हुआ है और आज तो यह कमीना मेरी चुत को सचमुच फाड़ ही देगा।
उसने मेरी तरफ आते हुए मेरी ब्रा और पेंटी को उतार फेंका और मेरी चूचियों को तेज़ी से दबाने लगा। मेरी धीरे से दर्द भरी आवाज़ निकलने लगी और मैं उससे कहती रही, “मुझे छोड़ दो प्लीज।”
लेकिन वो मुझसे बोला, “चुप साली कमीनी … आज बस तू मेरे लंड का मजा ले … मैं तुझे जन्नत की सैर करवाऊंगा … चुप रह रंडी कहीं की।”
थोड़ी देर बाद मेरा विरोध कम होने लगा और मैं उसके सामने शांत होने लगी। मुझे भी मजा आने लगा था। वो मेरे मम्मों को अपनी बड़ी-बड़ी हथेलियों में भींचकर पूरी दम से मसल और रगड़ रहा था। वो इतनी तेज़ी से मेरे मम्मों का मलीदा बना रहा था जैसे कोई राक्षस हो।
वो मेरे ऊपर लदा हुआ था और मैं अपने नीचे उसका खड़ा लंड महसूस कर रही थी। उसकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उसका पसीना मेरे बदन पर टपक रहा था।
कोई 15 मिनट बाद वो मम्मों को अच्छे से रगड़ने के बाद मुझसे बोला, “चल साली रंडी … मेरा लंड मुंह में लेकर इसे चूस।”
पहले तो मैंने मना किया लेकिन उसने जबरदस्ती अपना मोटा लंड मेरे मुंह में डाल दिया। उसका गर्म और मोटा लंड मेरे होंठों को फैलाते हुए अंदर घुसा। मैं उसकी पूरी लंबाई निगल नहीं पा रही थी। मेरी आंखों से पानी निकलने लगा।
थोड़ी देर में उसके लंड का साइज़ और भी ज्यादा बढ़ने लगा और मुंह से बाहर आने लगा। मैं उसके लंड को चूसने लगी। मेरी जीभ उसके लंड की नसों पर घूम रही थी। उसका नमकीन स्वाद मेरे मुंह में भर गया था। जब उसका लंड अच्छे से बड़ा हो गया तब उसने अपने लंड को मेरे मुंह से निकाल लिया।
मैं उसके पूरी तरह से खड़े लंड को देखकर घबरा गई लेकिन मुझे मेरी चुत की आग लगातार गर्म कर रही थी।
वो लंड को मेरी चुत पर ले गया और सुपारा घिसते हुए बोला, “साली रंडी कितनी मस्त है तेरी चुत … लगता है तेरा पति तुझे अच्छे से चोद नहीं पाता … चल कोई बात नहीं … आज मैं इसको भोसड़ा बना दूंगा … तू चिंता मत कर।”
वो अपना लंबा लंड मेरी चूत की फांकों में फंसा कर मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया। उसने मेरी तरफ देखा। मैं घबरा कर अपनी आंखें बंद कर ली थीं। मुझे मालूम था कि जैसे ही इसका लंड अंदर जाएगा मेरी चुत एक कबाड़खाना बन जाएगी।
लेकिन चुत की सारी आग ठंडी करवाने की ललक मुझे उसके लंड से चुदवाने के लिए उकसा रही थी।
उसने लंड चुत पर रखकर एक ज़ोर से धक्का दे मारा। उसका लंड मेरी चुत में अंदर घुसा और उसी पल मेरे मुंह से एक चीख निकल पड़ी, “अय्या … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह … मर गई।”
वो मुझे डांटता हुआ बोला, “चुप साली रंडी … अभी थोड़ी देर में तुझको भी मजा आने लगेगा।”
इसके बाद उसने एक और धक्का मारा तो उसका आधा लंड मेरी चुत के अंदर चला गया। मैं फिर से दर्द से चीख उठी, “आह मर गई … प्लीज प्लीज … अब रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है … आ … अय्या … अय्या।”
वो कमीना मेरी एक ना सुनने वाला था। दूसरे ही पल उसने एक और धक्का दे मारा। इस बार उसका लंड पूरा मेरी चुत में चला गया। मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था। क्योंकि पहली बार मैंने इतना बड़ा लंड अपनी चुत में लिया था।
वो थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रुका रहा। फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा।
अब मुझे भी दर्द कम होने लगा था और मैं मजे लेने लगी थी। वो अब अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल कर चुदाई कर रहा था। वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को अब भी जानवरों की तरह रगड़ रहा था।
मुझे मजा आने लगा और मेरे मुंह से आनंद भरी सिसकारियां निकलने लगी थीं, “आह … स्स्स्स … आहह … स्स्स्स्स।”
फिर वो मुझसे बोला, “साली रंडी पहले तो नखरे दिखा रही थी और अब लंड के मजे ले रही है। आज तू देख … तेरी चुत का मैं गड्डा बना दूंगा।”
तब मैं बोली, “चोद कमीने … और ज़ोर से चोद … फाड़ दे मेरी चुत को मादरचोद … आज मुझे रगड़ रगड़ कर चोद ताकि मैं दो दिन तक सही से चल ना पाऊं।”
वो धक्के देते हुए बोला, “साली रंडी आज तुझको ऐसे ही चोदूंगा … तू देखती जा बस … आज के बाद तू मुझसे ही चुदाएगी रोज … ले रंडी ले।”
और उसने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी। मेरे मुंह से “स्सा … आ … अय्या … इस्स … इस्स्स्स।” की आवाज़ तेज़ी से आने लगी। मैं कमर उठा-उठाकर उससे चुदवाने लगी। मैं भी चुदाई की जन्नत की सैर का मजा लेने लगी, “आह चोद दे साले कमीने … आ … आह … ऐसे … ही … पेल पूरा … हां … ऐसे चोद मादरचोद मुझे … फाड़ दे मेरी चुत को!”
उसके हर जोरदार धक्के से मेरी चुत की दीवारें फैल रही थीं। उसका मोटा लंड मेरी चुत को पूरी तरह भर रहा था। गर्म पसीना दोनों के बदन से टपक रहा था। चुदाई की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी।
कोई 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो मेरे अंदर ही झड़ गया और ढेर हो गया। इस बीच मैं तीन बार झड़ चुकी थी।
वो मुझसे बोला, “बता मेरी जान … मजा आया कि नहीं?” मैं उसे चूमते हुए बोली, “बहुत मजा आया मेरे चोदू राजा।”
फिर दस मिनट के बाद उसका लंड फिर से पूरी ताकत से तन गया। उसने मुझे इस बार अपने ऊपर बैठने को कहा। वो बेड पर चित लेट गया। मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसके खड़े मोटे लंड पर अपनी गीली चुत फंसा कर बैठ गई। मैंने धीरे-धीरे अपने कूल्हे नीचे करके उसके पूरे मूसल जैसे लंड को अपनी चुत के अंदर ले लिया।
अब वो नीचे से मुझे हवा में उठा-उठाकर जोरदार धक्के देने लगा। उसके मजबूत हाथ मेरे भारी मम्मों को पूरी ताकत से मसल रहे थे। मेरी चूचियों के निप्पल उसके उंगलियों के बीच दबकर लाल हो गए थे।
मुझे उसके लंड से चुदने में बेहद मजा आ रहा था। हर धक्के पर उसका मोटा लंड मेरी चुत की गहराई तक पहुंच रहा था। मैं लगातार 20 मिनट तक ऐसे ही उसके ऊपर चुदती रही। मेरी चुत से चुदाई की आवाजें और हम दोनों के पसीने की गंध पूरे कमरे में फैल गई थी। फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए और ऐसे ही थककर 20 मिनट तक लिपटे पड़े रहे। आज उसने मुझे सचमुच जन्नत की सैर करवा दी थी। आज मैं बहुत खुश थी।
मैं उससे बोली, “तुम मुझे ऐसे ही रोज चोदा करो … मेरा नामर्द पति कुछ नहीं कर पाता।”
वो मेरी चूची दबा कर बोला, “तू चिंता मत मेरी रांड … मैं अब तेरी चुत को भोसड़ा बना दूंगा। मैं अपने साथ अपने दोस्तों से भी तुझे चुदवाऊंगा और तेरी चुत को चबूतरा बना दूंगा।”
उसकी बात सुनकर मैं पहले तो डर गई। मेरे मन में एक झटका सा लगा। मैं घबराकर बोली, “नहीं तुम अकेले ही आना … किसी और को मत लाना … कहीं मेरे पति को पता चल गया तो उन्हें बहुत गुस्सा आएगा।”
वो हंसते हुए बोला, “साली रांड मुझसे चुदवा रही है, तब तेरा पति क्या तेरी आरती उतारेगा। होने दो भोसड़ी वाले को गुस्सा। अब चुपचाप जो मैं बोलूं वही करना। मैं जिसको भी तेरी चुत चुदाई के लिए लाऊंगा, तुम बस उससे अपनी चुत चुदवा लेना।”
मैं एक पल को तो डरी लेकिन फिर मन ही मन खुश हो गई कि अब तो रोज बदल-बदल कर मोटे-मोटे लंड मिलेंगे। मेरी चुत फिर से गीली होने लगी थी।
वो कहता जा रहा था, “जो भी तुमको चोदना चाहेगा … उससे हजार रुपये भी वसूल लेना। समझो अब तुम मेरी रंडी हो गई हो।”
मैं कुछ नहीं बोली। बस शर्म से मेरे गाल लाल हो गए थे। वो मुझे गहरी किस करके चला गया।
फिर बाद में वो अपने दोस्तों को लाता और वो लोग मुझे पूरी तरह रंडी बना कर चोद देते। कुछ ही दिनों में सब्जी वाले और उसके दोस्तों ने मेरी चुत का भोसड़ा बना दिया। उनका जब भी मन होता, वे बिना बताए आ जाते और मुझे चोद कर चले जाते। मुझे भी इन लंबे-लंबे, मोटे-मोटे लंड से चुदने में अब खूब मजा आने लगा था। मैं बहुत खुश रहती थी।
मैं समझती हूं कि एक नामर्द की बीवी को सही मायने में औरत होने की खुशी इन्हीं लोगों से चुदने से मिलती थी।
मैं चुद-चुद कर इन लोगों की रंडी बन गई थी … मेरे पति को अब तक पता नहीं चला था। प्लीज़ फ्रेंड्स आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी,
आपकी रंजू