लंड की सवारी करती हुई बहन

Mauseri bahan sex story: मेरी मौसी की बेटी यानि मेरी मौसेरी बहन गांव से पढ़ने हमारे घर रहने आई। मैंने उसकी कोरी देसी बुर की चुदाई कैसे की। पढ़ें मेरी इस देसी कहानी में।

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अमित राय है। मैं उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से कुछ दूर एक गांव में रहता हूं। मैं तीस साल का पांच फीट दस इंच हाइट का हट्टा कट्टा नौजवान हूं। मेरे लंड का साइज सात इंच लंबा और तीन इंच मोटा है और मैं किसी भी लड़की या औरत को पूरी तरह संतुष्ट कर सकता हूं।

मेरी ये बहन की देसी बुर की चुदाई कहानी आज से आठ साल पहले की है जो मेरी और मौसी की लड़की के बीच हुए सेक्स की है। मेरी मौसी की बेटी का नाम खुशबू है। उस समय उसकी उम्र उन्नीस साल थी। उसकी लंबाई पांच फुट पांच इंच थी और उसका चौंतीस अट्ठाईस चौंतीस का फिगर बेहद शानदार और आकर्षक था। उसके स्तन भरे हुए और गोल थे। उसकी कमर पतली थी और नितंब मोटे तथा लहराते हुए थे। जब वह अपनी सेक्सी गांड हिलाते हुए चलती थी तो आसपास के लोग उसे देखकर लालायित हो जाते थे। उसके काले घने बाल लहराते थे और चेहरे पर एक मासूमियत थी जो उसे और भी आकर्षक बनाती थी। आस पास के कई लड़के उसे लाइन मारते थे लेकिन वह किसी को भाव नहीं देती थी।

मैं अक्सर मौसी के घर जाया करता था। मौसी की दो लड़कियां ही थीं। कोई लड़का नहीं था। उनकी बड़ी बेटी की शादी हो चुकी थी। मौसा और मौसी मुझे बहुत मानते थे। वे गांव में रहते थे। बारहवीं पास करने के बाद मौसी ने मेरी मां से बात करके खुशबू को हमारे यहां पढ़ने के लिए भेज दिया। मैंने उसका एडमिशन लड़कियों के कॉलेज में करा दिया। अब घर में हम तीन लोग रहने लगे थे। मैं, मेरी मां और खुशबू। मेरे पापा नहीं थे।

खुशबू कॉलेज जाने लगी थी। मैं उसकी पढ़ाई में मदद कर देता था। उस समय तक मेरे दिमाग में उसके लिए कोई गलत विचार नहीं आया था। लेकिन एक दिन सुबह सुबह वह नहा रही थी। उसने भूल से बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया था। मेरी मां मंदिर गई हुई थीं।

मैं रात को केवल नेकर और बनियान पहनकर सोता हूं। सुबह उठते ही मुझे जोर की पेशाब लगी थी। मैं जल्दी से बाथरूम की ओर भागा। मेरे हाथ में मेरा लंड था जो पेशाब के लिए निकाला हुआ था। जैसे ही मैं दरवाजे के पास पहुंचा और उसे खोला, अंदर का नजारा देखकर मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं।

मेरे हाथ से लंड छूट गया। मेरा लंड तुरंत तीन इंच से बढ़कर सात इंच का खड़ा हो गया और सख्त होकर तन गया। खुशबू बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसने अपनी दोनों चूचियों को साबुन से रगड़ते हुए धो रही थी। उसके गुलाबी स्तन साबुन के झाग से चमक रहे थे। पानी की धार उसके शरीर पर बह रही थी। उसकी चिकनी देसी बुर साफ दिख रही थी। उसके मोटे होंठों वाले बुर के ऊपर हल्के बाल थे जो पानी से भीगकर चिपक गए थे।

जब उसने मुझे देखा तो वह चौंक गई। उसने एक हाथ से अपनी भरी हुई चूचियों को ढक लिया और दूसरे हाथ से अपनी देसी बुर को छिपाने की कोशिश की। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। वह सर नीचे करके दीवार से सट कर खड़ी हो गई। लेकिन उसकी नजर बार बार मेरे खड़े और मोटे लंड पर जा रही थी।

मैं बाथरूम के अंदर चला गया और दरवाजा बंद कर दिया। हवा में साबुन की महक और उसके शरीर की गर्मी महसूस हो रही थी। मैंने आगे बढ़कर उसे अपनी मजबूत बांहों में भर लिया। उसके नंगे गीले शरीर को अपनी छाती से चिपका लिया। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसके नरम और गीले होंठों का स्वाद मीठा था।

वह मुझे धकेलने की कोशिश कर रही थी। उसके हाथ मेरी छाती पर थे। वह हंसते हुए और शर्माते हुए बोल रही थी, “ये क्या कर रहे हो अमित… छोड़ो मुझे… आह…” मैंने उसे और कसकर जकड़ लिया। मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिर रहे थे। फिर मैंने उसके बड़े स्तनों को मसलना शुरू कर दिया। वे नरम, गर्म और भरे हुए थे। मेरी उंगलियां उनके निप्पल को दबा रही थीं। वे सख्त हो चुके थे। उसकी सांसें तेज हो गईं।

तभी बाहर दरवाजे पर मेरी मां के आने की आवाज सुनाई दी। हम दोनों तुरंत अलग हो गए। उसका चेहरा लाल था और सांसें फूल रही थीं। मैंने जल्दी से दरवाजा खोला और बाहर निकल गया।

इस घटना के बाद मेरी निगाह अपनी देसी बहन के खिलते हुए यौवन पर पूरी तरह टिक गई। खुशबू का नया नया जवानी का फूल अब मुझे हर पल आकर्षित करने लगा था। मैं उस मस्त फूल का रस चूसने को भौंरा बनकर बेचैन रहने लगा था। शायद उसे भी मेरे खड़े और मोटे लंड को नंगी हालत में देखकर अच्छा लगा था। मैंने महसूस किया कि अब जब भी मैं उसे देखता तो वह मेरे लंड के उभार को चुपके से देखने की कोशिश करने लगती। जब मैं उसे ऐसा करते पकड़ लेता तो अपने लंड पर हाथ फेरने लगता। इससे वह शरमाकर मुस्कुरा देती और मेरे सामने से हट जाती।

हमें अकेले में अच्छा मौका नहीं मिल रहा था। हम दोनों ही मन ही मन किसी अच्छे मौके की तलाश में रहने लगे थे। फिर एक दिन मुझे वह मौका मिल ही गया। मेरी मां को दस दिनों के लिए लखनऊ जाना था और उनकी शाम को ही ट्रेन थी। मैंने शाम को उन्हें स्टेशन पहुंचाकर ट्रेन में बैठा दिया। घर लौटते वक्त मैंने मेडिकल स्टोर से कुछ दवाइयों के साथ तीन चार कंडोम के पैकेट भी खरीद लिए। दिल में तरह तरह की हलचल हो रही थी। घर पहुंचकर मैंने सामान रखा और रात का इंतजार करने लगा।

खुशबू रात का खाना बना रही थी। मैं धीरे से पीछे की ओर गया। उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी छाती से उसकी पीठ चिपका दी। उसकी गर्दन पर गर्म सांसें छोड़ते हुए जोर जोर से चूमने लगा। मेरे होंठ उसकी नरम त्वचा पर दब रहे थे। खुशबू की देसी बहन भी मस्त हो गई थी। वह मेरी चूमने की क्रिया में साथ देने लगी। उसने अपनी गर्दन थोड़ी झुकाकर मुझे और बेहतर एक्सेस दिया। उसकी सांसें तेज हो गईं और हल्की सी आह निकलने लगी।

फिर वह थोड़ी हांफते हुए कहने लगी, “अभी रुक जाओ अमित… पहले मुझे खाना बना लेने दो… आह… बाद में…” मैं मुश्किल से हट गया। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था और नेकर में उभर रहा था।

उसने जल्दी जल्दी खाना बनाया। हम दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया। खाने के दौरान हमारी नजरें बार बार एक दूसरे से टकराती रहीं। उसकी आंखों में शर्म और उत्तेजना दोनों थे। खाना खत्म होने के बाद मैं बाहर ड्राइंग रूम में बैठ गया। वो बर्तन लेकर रसोई में चली गई।

जब वो रसोई से आई तो मैंने उसे गोद में उठा लिया और कमरे में ले जाकर बेड पर गिरा दिया। उसके बिस्तर पर गिरते ही मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके नरम गुलाबी होंठों को चूसने लगा। मेरी जीभ उसके मुंह में घुसकर उसके जीभ को लिपटाने लगी। वह भी मेरे होंठों को जोर से चूस रही थी। मैं धीरे धीरे उसके भरे हुए मम्मों को अपनी हथेलियों से दबा रहा था। उनके निप्पल मेरी उंगलियों के बीच सख्त होकर उभर आए थे।

वह भी गर्म होने लगी थी। उसका पूरा शरीर हल्का हल्का कांप रहा था। मैंने धीरे धीरे उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसके बाद अपने कपड़े भी उतार दिए। मेरा सात इंच लंबा और मोटा लंड पूरी तरह खड़ा होकर तन गया था। मैं उसके नंगे हो चुके मम्मों को चूसने लगा। मेरे मुंह में एक स्तन लेते हुए मैं जोर जोर से चूस रहा था। मेरी जीभ उसके निप्पल को घुमा रही थी। वह मस्ती में अह… उंह… आह… कुछ करो प्लीज… अंह… सीत्कार भर रही थी।

साथ ही वो मेरे लंड को अपनी नाजुक उंगलियों से पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी। उसका हाथ मेरे मोटे लंड पर फिसल रहा था। मैं जितनी तेजी से उसके मम्मों को दबाकर चूसने लगता था वह मेरे लंड को उतनी ही जोर से दबाकर ऊपर नीचे करने लगती थी। उसके हाथ की गर्मी और दबाव से मेरे लंड से थोड़ा प्री कम निकलने लगा था।

धीरे धीरे मैं उसे चूमते हुए उसकी पतली कमर, नाभि और फिर उसकी देसी बुर पर आ गया। अब मैं उसकी कोरी देसी बुर को अपनी गर्म जीभ से कुरेदने लगा। मेरी जीभ उसके बुर के ऊपरी हिस्से को चाट रही थी। उसकी बुर पहले से ही गीली हो चुकी थी। मेरी जीभ का अहसास अपनी बुर पर पाते ही वो एकदम से मचल गई। उसकी कमर ऊपर उठने लगी। मैं उसकी बुर चूसने लगा तो उसे जैसे करंट लग गया हो। वह जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी। आह… अमित… उंह… क्या कर रहे हो… अह… वो मेरे सर को पूरे जोर से पकड़ कर अपनी देसी बुर पर दबाने लगी।

चुदास की मस्ती ने हम दोनों को अंधा कर दिया था। हम दोनों को बस एक दूसरे के साथ सेक्स का खेल खेलने के अलावा कुछ सूझ ही नहीं रहा था। उसके शरीर की गर्मी, पसीने की हल्की महक और उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में भर गई थीं।

उसने धीरे से मेरे कान में कहा मुझे भी कुल्फी खानी है।

मैं झट से उठा और उसके मुंह की तरफ लंड करके लेट गया। अब हम दोनों सिक्स्टी नाइन की मुद्रा में हो गए थे। मेरे मुंह उसके गीले बुर के ठीक सामने थे और उसका मुंह मेरे खड़े लंड के पास था। वो मेरे मोटे लंड को अपनी गर्म जीभ से चाटने लगी। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। फिर वह उसे मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी। मैं उसकी देसी बुर को जी भर के चूसने में लगा था। मेरी जीभ उसके बुर के अंदर बाहर घुस रही थी। उसका मीठा नमकीन रस मेरी जीभ पर फैल रहा था।

फिर वो अपने पैरों से मेरे सर को अपनी बुर पर जोर से दबाने लगी। उसकी जांघें कांप रही थीं। अचानक उसका पूरा शरीर सख्त हो गया। वह जोर से कांपी और झड़ गई। उसके बुर से गर्म रस की धार निकली जो मेरे मुंह में भर गई।

उसके झड़ने के बाद भी मैंने उसकी बुर को चूसना नहीं छोड़ा। मैंने उसकी कोरी देसी बुर का सारा नमकीन रस चूस कर पी गया। मेरी जीभ लगातार उसके संवेदनशील क्लिटोरिस पर घूम रही थी। लगातार बुर चाटते रहने से वो कुछ ही पलों में फिर से गर्म हो गई थी। उसकी सांसें फिर से तेज हो गईं और वह कराहने लगी।

फिर मैंने उसे सीधा किया और उसकी टांगों के बीच में आकर बैठ गया। मैंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया। फिर उसकी देसी बुर पर अपने मोटे लंड को रगड़ने लगा। लंड का सिरा उसके गीले बुर के फांकों के बीच फिसल रहा था। वो इस वक्त चुदास से तड़प रही थी।

उसकी आंखें बंद थीं और मुंह से जोर जोर से बोल रही थी, “आंह… आंह… अब डाल दो प्लीज… अमित… मुझे और मत तड़पाओ…”

मैंने उसकी टांगें फैला कर उसकी बुर की फांकों में लंड घिसा तो वो और भी ज्यादा मचल गई।

मैंने लंड का सुपारा उसकी गीली बुर में रख कर धक्का मारा पर लंड फिसल गया। वो हल्के से कराह गई लेकिन जब लंड नहीं घुसा तो वो मुझे गुस्से से देखने लगी जैसे मुझे अनाड़ी कहने की कोशिश कर रही हो।

इस बार मैंने उसके कंधे को मजबूती से पकड़ा और लंड को देसी बुर पर अच्छे से टिका कर कंधे को अपनी तरफ खींचते हुए जोर का धक्का दे मारा। इस धक्के से मेरा आधा लंड उसकी तंग कोरी देसी बुर में घुस गया। वह एकदम से दर्द से तड़फ उठी। उसकी आंखें फट गईं और वह रोने लगी। वो लंड निकालने के लिए कहने लगी और मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी। पर मैंने उसे अपनी मजबूत बांहों से जोर से पकड़ रखा था जिससे वह हिल भी नहीं पाई। उसकी बुर मेरे लंड को जकड़े हुए थी।

मैंने उसके रोने की परवाह किए बिना लंड को आधा बाहर खींचा और एक और जोर का धक्का दे मारा। इस बार मेरा पूरा सात इंच लंबा मोटा लंड उसकी बुर में पूरी तरह समा गया। वह अब बेहोश सी होने लगी थी। उसकी सांसें रुक सी गईं। मैं उसकी हालत देख कर रुक गया और उसके भरे हुए मम्मों को चूसने लगा। मेरी जीभ उसके निप्पल को घुमा रही थी और हल्के दांत से काट रही थी।

थोड़ी देर में वह सामान्य हो गई। उसकी बुर अब थोड़ी ढीली पड़ने लगी थी। वह अपनी गांड हिलाने लगी। अब मैं भी जोर जोर से धक्के मारने लगा। मेरे लंड के हर धक्के से उसके स्तन हिल रहे थे। वह अंह… सीईई… अअअ… करने लगी।

मैं धक्के मारे जा रहा था। उसकी मस्ती भी मुझे मस्त करने लगी थी। उसकी तंग देसी बुर में पानी आ जाने के कारण लंड को अंदर बाहर करने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था। हर धक्के के साथ चुट चुट की आवाज हो रही थी। मैं उसकी चूचियों को मसलता और चूसता हुआ उसे धकापेल चोद रहा था।

कोई बीस मिनट की चुदाई के दौरान वह तीन बार झड़ चुकी थी। हर बार उसके शरीर में कंपकंपी छूट जाती और बुर सिकुड़कर मेरे लंड को दबाती। अब मेरा भी होने वाला था और उसका भी। वह मुझे जोर से पकड़ कर झड़ने लगी। उसकी नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। मैं भी उसकी बुर में ही झड़ गया। हम दोनों वैसे ही थककर सो गए।

एक घंटे बाद जब नींद खुली तो वो मुझसे चिपक गई। कंडोम अब भी मेरे लंड से चिपका पड़ा था। मैं उठ कर बैठा और लंड साफ करके लेट गया। वो मेरे लंड को सहलाने लगी।

फिर से अभिसार शुरू हो गया। उसने मेरे लंड को अपनी गर्म हथेली से सहलाया। फिर मुंह में लेकर चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के पूरे सिरे पर घूम रही थी। वह पूरी ताकत से चूस रही थी जिससे मेरा लंड फिर से सख्त और खड़ा हो गया। मैंने उसे सीधा किया और उसकी फटी हुई गीली बुर को चाट कर तैयार कर दिया। मेरी जीभ उसके बुर के अंदर तक घुस रही थी। फिर मैंने कंडोम चढ़ाया और उसकी देसी बुर में लंड पेल दिया। अबकी बार वो मस्ती से मेरे साथ सेक्स कर रही थी। वह अपनी कमर उठा उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।

कुछ देर बाद मैंने उसकी कमर पकड़कर उसे अपने लंड के ऊपर आने को कहा। वो मेरे लंड की सवारी करने लगी। वह ऊपर नीचे होकर लंड को पूरी तरह अंदर ले रही थी। उसके स्तन जोर जोर से उछल रहे थे। मैंने उन्हें मसलने शुरू कर दिए। फिर मैंने उसे कुतिया बनाकर पीछे से चोदा। उसकी मोटी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। मस्ती से चुदाई का मजा आने लगा था। हर धक्के के साथ कमरे में चुट चुट की आवाज और उसकी सिसकारियां गूंज रही थीं।

तीन बार की चुदाई के बाद वो मेरे बिस्तर की रानी बन गई थी।

ऐसा ही दस दिनों तक चला। हर दिन और हर रात हम मौका मिलते ही एक दूसरे को चोदते रहे। उसके बाद भी जब भी हमें अकेले में मौका मिलता हम सेक्स करते रहे।

फिर उसकी पढ़ाई खत्म हो गई और वह अपने गांव चली गई। अब उसकी शादी हो गई है।

आपको मेरी मौसी की लड़की यानि मेरी मौसेरी बहन की देसी बुर की चुदाई की कहानी कैसी लगी।

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