अन्तर्वासना फ्री सेक्स कहानी के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मेरा नाम संजय है। उम्र चौबीस साल की है। मैं जिला होशियारपुर पंजाब का रहने वाला हूं। मैं अपने बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता क्योंकि ज्यादातर लोग अपनी कहानियों में अपने बारे में इतना विस्तार से लिखते रहते हैं कि पढ़ने वाले का आधा समय तो बस उन्हीं की जिंदगी के ब्योरे पढ़ते-पढ़ते निकल जाता है। ऐसे में असली मजा ही नहीं आता। तो चलिए सीधे आते हैं मेरी इस आपबीती पर जो ट्रक ड्राइवर की बीवी की चुदाई से जुड़ी हुई है।
यह मेरी अपनी कहानी नहीं है बल्कि वह सब कुछ है जो मेरे साथ सच में घटा था। मैं उसे ठीक उसी तरह विस्तार से आपको सुनाना चाहता हूं। बात एक डेढ़ साल पहले की है जब मैं चंडीगढ़ शहर में पूरी तरह अकेला रहता था। दिन-रात अकेलेपन की उस ठंडी और भारी चुप्पी ने मुझे इतना परेशान कर दिया था कि मैं हर पल किसी न किसी के साथ रहने के लिए बेचैन रहता था। रातों को बिस्तर पर लेटे हुए छत को तकते हुए मन अंदर ही अंदर तड़पता रहता था और शरीर में वो खालीपन महसूस होता जो किसी को छूने भर से भी दूर हो जाए।
एक दिन किसी दोस्त ने मुझे वॉइस चैट के बारे में बताया। मैंने तुरंत ट्राई किया। मोबाइल की स्क्रीन पर चैट ऐप खुलते ही कान में हेडफोन लगाकर मैं अंधेरे कमरे में बैठ गया था जहां सिर्फ पंखे की हल्की आवाज और मोबाइल की रोशनी चेहरे पर पड़ रही थी। पहले तो ऐसे ही रैंडम लोग आते-जाते रहे। कभी कोई लड़की हंसती हुई आवाज में बात करती तो कभी कोई और। कुछ कॉल्स में बस सांसों की आवाजें आतीं या फिर दूर से ट्रैफिक का शोर। कुछ में लड़कियां सिर्फ हंसी-मजाक करतीं और तुरंत डिस्कनेक्ट हो जातीं। सबका मकसद बस टाइम पास करना ही होता था। फिर एक दिन मेरी बात अर्चना नाम की एक लड़की से हुई। उसके साथ काफी लंबी और गहरी बातचीत हो गई। बातों में सहजता थी और कुछ आकर्षण भी। मैंने उसे अपना नंबर दे दिया। मुझे उम्मीद नहीं थी कि वह कभी संपर्क करेगी।
लेकिन एक-दो दिन बाद अचानक मेरे व्हाट्सएप पर उसका मैसेज आया। स्क्रीन पर सिर्फ एक शब्द चमक रहा था – हाय। मैंने तुरंत जवाब दिया और पूछा कि आप कौन हो। उसने थोड़ी देर बाद रिप्लाई किया। उन्होंने जवाब दिया कि जिसको आपने अपना नंबर दिया मैं वही हूं।
तो मेरे को कुछ समझ नहीं लग रहा था कि यह है कौन। मैंने उनसे फिर पूछा कि मैंने किस को अपना नंबर दिया। मैंने तो किसी को अपना नंबर नहीं दिया। आप आप कौन हो।
तभी उसने बताया कि मैं अर्चना हूं। मेरी आपसे बात हुई थी दो दिन पहले वॉइस चैट पर। जब मैंने यह सुना तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा और चेहरे पर अनायास ही मुस्कान फैल गई। फिर उसने मेरे को कॉल किया। हमने काफी लंबी बात की।
मैंने उसको पूछा कि तुम कहां पर रहती हो। तो उसने मेरे को बताया कि मैं मोहाली में रहती हूं और मैरिड हूं। मैंने उसको पूछा कि उसके पति क्या करते हैं। तो उसने बोला कि उसके पति एक ड्राइवर हैं और ज्यादा टाइम वह बाहर ही रहते हैं। मैं समझ गया कि बात तो बन ही जाएगी।
मैंने उसकी थोड़ी सी तारीफ की आप बहुत अच्छे हो। आपकी आवाज बहुत ही अच्छी है। मैं आपसे मिलना चाहता हूं। क्या आप मेरे से मिलने के लिए तैयार हैं। वह पहले तो थोड़ा हिचकिचाई मगर बाद में वह मान गई।
अगले दिन जब हम लोग मिले तो मैंने उसको देखा वह क़यामत लग रही थी। उसने पंजाबी सूट पहना हुआ था। वह एकदम ही अलग दिख रही थी सबसे। उसका बदन बहुत ही गठीला था।
जब मैं उसको मिला तो मैं उसको देखता ही रह गया। मेरी नजर उसके ऊपर से हटाए भी नहीं हट रही थी। मैंने उससे उसका हालचाल पूछा। फिर हम लोगों ने इधर उधर की थोड़ी सी बातें की। उसका चेहरा देखकर लग रहा था कि शायद उसको यह जगह पसंद नहीं है। या शायद फिर वह डर रही थी। उसकी नजरें झुकी हुई थी। वह मेरे से नजरें मिलाकर बात भी नहीं कर पा रही थी।
मैंने उसको पूछा कि क्या हुआ। तो उसने बोला मुझे यहां पर कुछ ठीक नहीं लग रहा है। कहीं और चलते हैं।
हम वहां से उठे और एक पार्क में जाकर बैठ गए। हम लोग पार्क में पहुंचे तो वहां देखा के प्रेमी जोड़े बैठे हुए हैं। मैंने उसकी ओर देखा। वह भी मेरी तरफ से कर मुस्कुराने लग पड़ी। हम लोग एक साइड में बैठ गए। थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें की। बातों बातों में मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया। वह थोड़ी सी झिझक गई। उसने मेरा हाथ एकदम से अपने हाथ से ऊपर से हटा दिया और मेरी तरफ देखकर हल्की सी मुस्कुराने लगी।
आसपास में माहौल पूरा बना हुआ था। प्रेमी जोड़े एक दूसरे को चुम्बन कर रहे थे और गले मिल रहे थे। ऐसे में मैंने उसके साथ थोड़ी शरारती बातें की तो वो भी अब मेरे साथ थोड़ा खुलने लगी।
मैंने अचानक से उसको बोला वह देखो उधर क्या चल रहा है। तो जैसे ही उसने उधर देखा तो मैं अपना मुंह उसके मुंह के पास ले आया। उसने जैसे ही मुंह मेरी तरफ घुमाया तो मैंने उससे किस कर ली।
वो अचानक हुई इस हरकत से डर गई और वहां से उठ गई। वह वहां से उठ कर जाने लगी मगर मैंने पीछे से उसका हाथ पकड़ा। लेकिन वह नहीं रुकी। उसने अपना हाथ खींच कर मेरे से छुड़वा दिया और वहां से चली गई।
मैं यह सोचने लगा के अभी हाथ में आई हुई चीज ही मैंने गंवा दी। मैं यह सोच सोच कर बहुत दुखी हो रहा था। थोड़ी दूर जाकर उसने पीछे मुड़कर देखा लेकिन मैं उसके चेहरे के भाव को समझ ही नहीं पाया कि वह कहना क्या चाह रही है। वह धीरे धीरे वहां से चली गई लेकिन मैं उसके पीछे नहीं गया।
मैं वहां से उठकर सीधा अपने घर चला गया और अपने आप को कोसने लगा कि यह मेरे से आज क्या हो गया।
ऐसे ही दो तीन दिन निकल गए। ना तो मैंने उसको कोई मैसेज किया ना ही उसने मेरे को मैसेज किया। और ना ही कॉल पर बात हुई।
दो तीन दिन बाद अर्चना का एक मैसेज आया हेलो क्या हाल है। मैंने उसका रिप्लाई देते हुए कहा मैं ठीक हूं आप बताओ कैसे हो। तो उसने मेरे को बोला आप जैसा छोड़ गए हो वैसी ही हूं। मैंने उसको सॉरी बोला। मैंने बोला मैं उस बात के लिए बहुत शर्मिंदा हूं। कृपया मुझे माफ कर दें। उसने पूछा किस बात की माफी। तो मैं बोला उस दिन जो पार्क में हुआ था उस बात के लिए।
अर्चना बोली ऐसी छोटी मोटी चीजें तो दोस्तों के बीच चलती रहती हैं। यह सुनकर मेरी सांस में सांस आई। मेरी थोड़ी सी हिम्मत बढ़ गई।
मैंने उससे पूछा तो दोस्तों को भी सिर्फ ऐसा ही चलता है या इससे ज्यादा भी कुछ चल सकता है। उसने हां में जवाब दिया और कहने लगी जैसा आप चाहें वैसा चल सकता है।
मैंने उसको फिर से मिलने के लिए कहा लेकिन वह बोली हम बाहर नहीं मिल सकते क्योंकि बाहर मेरे को अच्छा नहीं लगता। तो मैंने उसे कहा हम बाहर नहीं मिलेंगे तो कहां मिलेंगे। उसने मेरे को कहा कि मैं उसके घर आ जाऊं। उसने मेरे को अपना एड्रेस दिया।
मैंने उसको पूछा कि उसके पति कहां पर हैं तो उसने जवाब दिया कि वे ड्राइवर हैं। वह पता नहीं कब वापस आएंगे। कभी महीना लग जाता है कभी दो महीने।
अगले दिन तैयार होकर मैं उसके घर गया। मैंने उसके घर के बाहर जाकर डोरबेल बजाई। अर्चना ने दरवाजा खोला। मैंने उसको देखा तो देखता ही रह गया। उसने सफेद रंग का सूट पहना हुआ था। मैंने उसकी तारीफ की आप बहुत ही सुंदर लग रही हो। वह थोड़ा सा मुस्कुरा दी।
उसने मेरे को अंदर बिठाया और मेरे को चाय पानी पूछा। तो मैंने उसको कहा आप थोड़ा सा पानी पिला दीजिए। वह एक गिलास पानी लेकर आई और वहां पर खड़ी हो गई। मैंने उसको अपने पास बैठने के लिए कहा तो वह मेरे पास आकर बैठ गई। ना तो वह कोई बात कर रही थी ना ही मैं कोई बात कर रहा था।
वो एकदम से उठी उसने जाकर टीवी ऑन कर दिया और रिमोट मेरे को पकड़ा दिया बोली जो आप देखना चाहते हो देख सकते हो। मैं टीवी के चैनल चेंज कर रहा था और तभी सोंग्स चल पड़े। उसने कहा कि यह चलने दो अच्छा लग रहा है। मैंने सॉन्ग चलने दिए और उसने मेरे से रिमोट लेकर थोड़ी सी वॉल्यूम बढ़ा दी। वह एकदम मेरी तरफ देखे जा रही थी जैसे कि मुझे खा ही जाएगी।
मैंने उसको कहा मेरे को यह सॉन्ग नहीं सुनना है। उससे रिमोट लेने के बहाने मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। वह मुस्कुराने लगी। मैं समझ गया कि सिग्नल ग्रीन है। मैंने उसके हाथ पर थोड़ा सा अपना हाथ चलाया और उसकी नरम हथेली को महसूस करते हुए उंगलियों से हल्का दबाव दिया। उसने आंखें बंद कर ली।
मैं उसके ऊपर गया और उसको किस कर दी। मेरे होंठ उसके गर्म और नरम होंठों पर दब गए। धीरे-धीरे किस गहरी होती गई जहां मैं उसकी सांसों की गर्माहट और हल्की सी कांपती हुई सांस महसूस कर रहा था। उसने भी मेरा पूरा साथ दिया और अपने हाथों से मेरी पीठ को कसकर पकड़ लिया। मैं वहां से उठाकर उसको बेडरूम में ले गया उसको वहां बेड पर लिटाया और वहां उसको पांच मिनट किस किया। फिर मैंने वहां उसके सारे कपड़े खोले। उसके सूट की सलवार खोलते समय उसकी नरम जांघों को छूते हुए मैंने उसे ऊपर उठाया। फिर मैंने उसको कहा तुम मेरे कपड़े खोलो। उसने मेरे कपड़े खोले। मेरा लंड पूरा रॉड बना खड़ा था तो जब उसने मेरी चड्डी उतारी तो मेरे लंड ने ऊपर को उठ कर ऐसे झटका मारा जैसे वो अर्चना को सलामी दे रहा हो। यह देख कर वह हंसने लग पड़ी। जवाब में मैं भी हंस दिया।
तब मैंने अपनी पैंट की जेब से कंडोम निकाला और उसे पकडाते हुए कहा लो इसे मेरे लंड पर चढ़ा दो। लेकिन उसने मना कर दिया।
मुझे थोड़ा सा अजीब लगा और थोड़ा गुस्सा भी आया और मैंने कंडोम लगाया ही नहीं। मैंने अर्चना को बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया। मैंने पहले उसके होंठों को जोर से चूसना शुरू किया। उसके निचले होंठ को अपने मुंह में लेकर खींचता रहा। फिर उसकी गर्दन पर मुंह लगाया और चूसने लगा। वो सिसकारियां भर रही थी। उसके हाथ मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगे। मैं उसके बड़े बूब्स को मसलता हुआ चूसने लगा। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। वो बार बार अपनी कमर उछाल रही थी।
धीरे धीरे मैं उसके पेट की तरफ बढ़ गया। उसकी चूत पर मुंह रख दिया और जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मेरा मुंह उसकी चूत के रस से भर गया। वो अपने कूल्हे जोर जोर से उछाल रही थी। “आहह… और चाटो ना… मजा आ रहा है,” वो सांस फूलते हुए बोली। उसकी टांगें कांप रही थीं। मैंने उसकी टांगें चौड़ी करके बीच में आ गया। मेरा लंड उसकी चूत पर रगड़ रहा था।
मुझे ख्याल आया कि अगर डिस्चार्ज हो गया तो प्रॉब्लम हो सकती है। मैंने कंडोम उठाकर अपने लंड पर चढ़ा लिया। फिर धीरे से लंड का सुपारा उसकी चूत के मुंह पर लगाया। धीरे धक्का मारा लेकिन उसकी चूत थोड़ी टाइट थी। लंड अंदर नहीं गया। अर्चना हंस पड़ी। “अरे अनाड़ी… जोर से मार ना,” उसने मजाक में कहा।
अगला धक्का मैंने जोर से लगाया। पूरा लंड एक ही झटके में उसकी चूत के अंदर चला गया। “उम्म्ह… आहह… हय्य… याह…” वो जोर से चीख पड़ी। उसके चेहरे पर दर्द और मजा दोनों दिख रहे थे। आंखें बंद करके होंठ काट रही थी। मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो “आह… उफ… और जोर से… मदरचोद… चोद मुझे” कह रही थी। मैंने भी कहा, “ले साली… कितनी टाइट चूत है तेरी… ले पूरी… कुत्तिया।”
वो अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेटकर कसकर जकड़ रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे। मैंने रफ्तार बढ़ा दी। उसकी सांसें तेज हो गईं। “हां… ऐसे ही… गाली दो मुझे… मैं तेरी रंडी हूं,” वो कराहते हुए बोली। मैंने उसे पलटकर कुत्ते की मुद्रा में कर दिया। पीछे से लंड डाला और जोर जोर से ठोके लगाने लगा। वो बिस्तर पर मुंह गड़ाए “आह… आह… फाड़ दो मेरी चूत… मदरचोद” चिल्ला रही थी।
उसकी कमर मेरे हर धक्के के साथ उठ रही थी। चेहरे पर पसीना चमक रहा था। वो बार बार सिर हिला रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और खींचे। “ले कुत्तिया… तेरी चूत को आज अच्छे से चोदूंगा,” मैंने कहा। वो जवाब में बोली, “हां… और खींच… रंडी को चोदते रहो… मजा आ रहा है।” फिर मैंने उसे अपनी गोद में उठाकर बैठे बैठे चोदा। उसकी कमर पकड़कर ऊपर नीचे कर रहा था। वो मेरे कंधे पर सिर रखे हुए जोर से सिसक रही थी।
“बहुत अच्छा लग रहा है… और तेज… रंडी बन गई हूं तेरी,” वो हांफते हुए बोली। मैंने उसके बूब्स दबाते हुए कहा, “ले कुत्तिया… मेरे लंड की भूखी… पूरी चुदाई करवा ले आज।” हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। उसकी चूत से रस बह रहा था। मैंने फिर उसे सीधे लिटाकर मिशनरी में चोदा। धक्के लगाते हुए उसकी आंखों में आंखें डालीं। उसका चेहरा लाल हो रहा था। वो बार बार अपनी टांगें फैलाकर ले रही थी।
“उफ्फ… आह… हां… और चोद… तेरी रंडी की चूत फाड़ दे,” वो लगातार गालियां देते हुए कह रही थी। उसकी सांसें फूल रही थीं। “मदरचोद… जोर से… मुझे गाली दे,” वो मांग रही थी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर और तेज धक्के मारे। “ले रंडी… तेरी चूत मेरी है आज,” मैंने जवाब दिया। उसके नाखून फिर से मेरी पीठ पर गड़ गए। वो अपनी टांगें मेरी कमर पर और कसकर लपेट रही थी। मैंने आखिर में जोर जोर से धक्के मारे। उस दिन मैंने अर्चना को दो बार चोदा। उस दिन के बाद जब भी हमें मौका मिलता है हम दोनों चुदाई करते हैं।