Cheating Wife Story हेलो, मेरा नाम राजू है। मैं पुणे में रहता हूँ। मेरी उम्र 28 साल है, और मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ। मेरी हाइट 5 फीट 5 इंच है, और मेरा लंड 4.5 इंच का है, जो शायद मेरी बीवी को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाता। दो साल पहले मेरी शादी हुई थी। मेरी बीवी का नाम नीलम है, और वो 26 साल की है। उसकी फिगर 32-26-34 है, हाइट 5 फीट 3 इंच, और वो एकदम गोरी है, जैसे दूध की तरह। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी हैं, और होंठ गुलाबी, जो देखते ही मन मोह लेते हैं। मैं उसे दिल से चाहता हूँ, लेकिन शायद मेरी चाहत उसे पूरी तरह बाँध न सकी।
नीलम और मैं एक ही कॉलेज में पढ़े थे। वो मेरी जूनियर थी, और वहीं से हमारी लव स्टोरी शुरू हुई। कॉलेज के दिनों में हम घंटों बातें करते, एक-दूसरे के साथ समय बिताते, और धीरे-धीरे प्यार हो गया। शादी के बाद शुरुआती दिन बहुत खूबसूरत थे। हम रातों को देर तक जागते, एक-दूसरे की बाहों में समय बिताते, और प्यार भरी बातें करते। लेकिन शादी के दो साल बाद चीजें बदलने लगीं। नीलम को मेरा लंड शायद अब बेकार लगने लगा था। मैंने कई बार उससे पूछा, पर वो हमेशा टाल देती। मुझे उस पर पूरा भरोसा था कि वो मुझे कभी धोखा नहीं देगी, लेकिन शायद ये मेरी सबसे बड़ी भूल थी।
हमारा कोई बच्चा नहीं है। डॉक्टर ने बताया कि मेरे वीर्य में शुक्राणुओं की कमी है, जिसके कारण नीलम गर्भवती नहीं हो पा रही थी। इस बात ने मुझे अंदर से तोड़ दिया, लेकिन नीलम ने कभी शिकायत नहीं की। फिर भी, मुझे लगता था कि वो मुझसे पूरी तरह खुश नहीं थी।
एक दिन की बात है, नीलम का पुराना स्कूल का दोस्त रवि उससे मिलने हमारे घर आया। रवि 27 साल का था, लंबा-चौड़ा, और देखने में आकर्षक। उसकी हाइट 6 फीट थी, और उसका व्यक्तित्व ऐसा था कि कोई भी उससे प्रभावित हो जाए। नीलम उसके साथ बहुत खुलकर बात कर रही थी। हँस-हँसकर पुरानी यादें ताजा कर रही थी, और दोनों की बातों में एक अजीब सी नजदीकी दिख रही थी। मुझे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन मैंने सोचा कि बचपन के दोस्त हैं, ऐसा तो होता ही है। मैं चुप रहा और कुछ नहीं बोला।
रवि अब हमारे शहर में ही रहने लगा था। वो अक्सर घर आने लगा, लेकिन नीलम मुझे कभी नहीं बताती थी कि रवि आया था। मुझे उसकी ये चुप्पी खटकने लगी, लेकिन मैंने सोचा कि शायद मैं ज्यादा सोच रहा हूँ। फिर एक दिन ऑफिस से मुझे जल्दी छुट्टी मिल गई। मैंने सोचा कि आज नीलम को सरप्राइज दूँगा। मैंने उसे फोन नहीं किया और सीधे घर पहुँच गया। जैसे ही मैंने घर का दरवाजा खोला, मुझे रसोई से कुछ आवाजें सुनाई दीं। आवाजें नीलम और रवि की थीं। मेरे दिल में एक अजीब सी बेचैनी उठी, लेकिन मैंने खुद को समझाया कि शायद कुछ गलत नहीं है।
मैं चुपके से रसोई की तरफ बढ़ा। जो मैंने देखा, उसने मेरे पैरों तले जमीन खिसका दी। रवि नीलम की गांड से चिपककर खड़ा था, उसके हाथ नीलम की कमर पर थे। मेरा खून खौल उठा। मैं उसे वहीं मारने के लिए आगे बढ़ना चाहता था, लेकिन न जाने क्यों मेरे दिमाग में एक विचार आया कि पहले देखूँ तो सही कि ये दोनों क्या कर रहे हैं। मैं चुपके से एक कोने में छिप गया और सब देखने लगा।
अगले ही पल रवि ने नीलम को अपनी ओर घुमाया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। नीलम ने पहले तो उसे हटाने की कोशिश की, लेकिन रवि की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो छूट नहीं पाई। या शायद, वो छूटना ही नहीं चाहती थी। वो थोड़ी देर तक कसमसाती रही, लेकिन फिर उसने विरोध करना बंद कर दिया। रवि अब बेदर्दी से उसके होंठ चूस रहा था, और उसके हाथ नीलम के मम्मों को जोर-जोर से मसल रहे थे। नीलम की साँसें तेज हो रही थीं, और उसकी आँखें बंद थीं। शायद उसे भी अब मजा आने लगा था।
“उफ्फ… रवि… ये क्या कर रहे हो?” नीलम ने धीमी आवाज में कहा, लेकिन उसकी आवाज में विरोध कम और उत्तेजना ज्यादा थी।
“क्यों, तुझे अच्छा नहीं लग रहा?” रवि ने मुस्कुराते हुए कहा और फिर से उसके होंठों पर टूट पड़ा। उसने नीलम का टॉप ऊपर खींचा और उसे उतार फेंका। नीलम ने एक काली, पारदर्शी ब्रा पहनी थी, जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। मेरे दिल में शक पक्का हो गया कि ये ब्रा रवि ने ही उसे दी होगी। रवि ने एक झटके में उसकी ब्रा को फाड़ दिया। नीलम के 32D साइज के मम्मे अब पूरी तरह नंगे थे। उनकी गुलाबी चूचियाँ सख्त हो चुकी थीं, जैसे वो रवि के स्पर्श का इंतजार कर रही हों।
रवि ने एक मम्मे को अपने हाथ से दबाया और दूसरे को मुँह में ले लिया। वो जोर-जोर से चूसने लगा, और नीलम की सिसकारियाँ रसोई में गूँजने लगीं। “आह्ह… रवि… धीरे… उफ्फ…” नीलम की आँखें बंद थीं, और वो अपने होंठ काट रही थी। रवि ने उसकी चूची को दाँतों से हल्का सा काटा, जिससे नीलम की सिसकारी और तेज हो गई। “उह्ह… कितना अच्छा लग रहा है…” नीलम ने धीरे से कहा, और उसने रवि के बालों को सहलाते हुए उसे और करीब खींच लिया।
लगभग 15 मिनट तक रवि नीलम की चूचियों को चूसता रहा, कभी एक को, कभी दूसरे को। नीलम अब पूरी तरह वासना में डूब चुकी थी। उसकी साँसें तेज थीं, और उसका शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था। रवि ने अब उसके होंठों को फिर से चूसना शुरू किया। इस बार नीलम ने भी उसका साथ दिया। दोनों के होंठ एक-दूसरे से चिपक गए, और उनकी जीभें एक-दूसरे से उलझ रही थीं। रवि का एक हाथ नीलम की गांड पर था, और वो उसे जोर-जोर से दबा रहा था।
मैं ये सब देखकर सन्न रह गया था। मेरा दिल टूट चुका था, लेकिन मेरा शरीर जैसे जम गया था। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा था। रवि ने अब नीलम को गोद में उठाया और रसोई की मेज पर लिटा दिया। उसने नीलम की जीन्स की बटन खोली और उसे नीचे खींच दिया। नीलम ने गुलाबी रंग की थोंग पैन्टी पहनी थी, जो उसने मुझसे हमेशा कहा था कि उसे पसंद नहीं है। ये देखकर मेरा दिल और बैठ गया। मुझे यकीन हो गया कि ये सब पहले से चल रहा था।
रवि ने नीलम की पैन्टी को एक झटके में फाड़ दिया। नीलम की गुलाबी, तंग चूत अब उसके सामने थी। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, और उसकी चमक रवि को और उत्तेजित कर रही थी। रवि ने नीचे झुककर उसकी चूत पर एक लंबा चुम्मा लिया। “आह्ह… रवि… उफ्फ…” नीलम की सिसकारी निकल पड़ी, और वो मचलने लगी। रवि ने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। उसकी जीभ नीलम की चूत के हर हिस्से को छू रही थी। वो कभी उसकी क्लिट को चूसता, तो कभी अपनी जीभ को अंदर डाल देता। नीलम की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल रही थीं। “उह्ह… रवि… और जोर से… आह्ह…”
नीलम ने अपनी चूत को ऊपर उठा-उठाकर रवि के मुँह पर रगड़ा। कुछ ही मिनटों में उसका शरीर अकड़ गया, और वो जोर से चिल्लाई, “आह्ह… मैं झड़ रही हूँ… उफ्फ…” उसकी चूत से रस बहने लगा, और रवि ने उसे चाट-चाटकर साफ कर दिया।
अब रवि ने अपनी उंगली नीलम की चूत में डाल दी। पहले एक, फिर दूसरी। “उह्ह… रवि… धीरे…” नीलम की आवाज में दर्द और मजा दोनों थे। रवि ने उसकी आँखों में देखते हुए अपनी उंगलियों को और तेजी से अंदर-बाहर करना शुरू किया। नीलम की चूत अब पूरी तरह गीली थी, और हर धक्के के साथ ‘पच-पच’ की आवाजें आ रही थीं। “हाय… रवि… तू कितना अच्छा करता है… आह्ह…” नीलम की सिसकारियाँ अब कमरे में गूँज रही थीं।
“तेरी चूत तो अभी भी इतनी टाइट है, नीलम,” रवि ने हँसते हुए कहा। “तेरे पति का लंड तो कोई लुल्ली ही होगा, जो तुझे संतुष्ट नहीं कर पाया।” ये सुनकर नीलम ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उसकी आँखों में एक चमक थी। उसने रवि की पैन्ट खोली और उसका अंडरवियर नीचे खींच दिया। रवि का 8 इंच का मोटा लंड बाहर आया। उसका लंड देखकर नीलम के चेहरे पर मुस्कान आ गई। “इतना बड़ा…” उसने धीरे से कहा और रवि के लंड को अपने हाथ में ले लिया।
नीलम ने रवि के लंड को अपने मुँह में ले लिया। वो उसे धीरे-धीरे चूसने लगी, पहले सिर्फ सुपारा, फिर पूरा लंड अपने गले तक लेने की कोशिश करने लगी। “उम्म… कितना मोटा है…” नीलम ने लंड को मुँह से निकालकर कहा और फिर उसे चाटने लगी। वो रवि के लंड को ऊपर से नीचे तक चाट रही थी, और उसकी गोलियों को भी हल्के-हल्के दबा रही थी। रवि की सिसकारियाँ निकल रही थीं। “आह्ह… नीलम… तू तो कमाल है… और चूस…”
करीब 20 मिनट तक नीलम रवि के लंड को चूसती रही। फिर रवि ने उसे मेज पर फिर से लिटाया और उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा। “रेडी है, नीलम?” रवि ने पूछा। नीलम ने सिर्फ सिर हिलाया, और रवि ने एक जोरदार धक्का मारा। उसका 8 इंच का लंड नीलम की चूत में पूरा घुस गया। “आह्ह… रवि… धीरे… उफ्फ…” नीलम की चीख निकल गई, और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। लेकिन वो आँसू दर्द के नहीं, बल्कि खुशी के थे।
रवि ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के के साथ नीलम की चूत से ‘पच-पच’ की आवाजें आ रही थीं। “उह्ह… रवि… और जोर से… आह्ह…” नीलम अब पूरी तरह वासना में डूब चुकी थी। वो अपनी गांड को ऊपर उठा-उठाकर रवि के धक्कों का जवाब दे रही थी। रवि ने उसकी टांगें चौड़ी कीं और और जोर से चोदना शुरू कर दिया। “तेरी चूत तो जन्नत है, नीलम…” रवि ने कहा, और उसने नीलम के मम्मों को फिर से मसलना शुरू कर दिया।
करीब 25 मिनट तक रवि नीलम को चोदता रहा। इस दौरान नीलम तीन बार झड़ चुकी थी। उसकी सिसकारियाँ अब चीखों में बदल चुकी थीं। “आह्ह… रवि… और तेज… उफ्फ… मैं फिर झड़ रही हूँ…” हर बार वो झड़ती, उसका शरीर काँप उठता। रवि अब अपने चरम पर था। उसने अपनी रफ्तार और तेज कर दी। “नीलम… मैं झड़ने वाला हूँ…” उसने चिल्लाते हुए कहा और एक जोरदार धक्के के साथ अपना सारा माल नीलम की चूत में उड़ेल दिया। नीलम भी उसी वक्त फिर से झड़ गई। “आह्ह… रवि… उफ्फ…”
दोनों निढाल होकर मेज पर ही लेट गए, एक-दूसरे से लिपटकर। उनकी साँसें तेज थीं, और उनके चेहरे पर संतुष्टि की चमक थी। मैं ये सब देखकर टूट चुका था। मैं चुपके से वहाँ से निकल गया, जैसे एक हारा हुआ इंसान।
जब मैं रात को घर लौटा, नीलम बहुत खुश दिख रही थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। कुछ दिनों बाद मुझे पता चला कि नीलम गर्भवती है। उसका तीसरा महीना चल रहा था। मुझे यकीन था कि ये बच्चा मेरा नहीं, रवि का था। रवि आज भी नीलम को चोदने आता है, और मैं अपनी लाचारी पर चुप रहता हूँ।
लेकिन एक दिन मैंने नीलम से बात की। “नीलम, तेरा दोस्त रवि बहुत अच्छा इंसान है। क्यों न उसे यहाँ रहने को बुला लें?” मैंने हँसते हुए कहा। नीलम मेरी बात सुनकर इतनी खुश हुई कि उसने मुझे पाँच मिनट तक चूमा। “तुम कितने अच्छे हो, राजू…” उसने कहा। मुझे पता था कि वो और रवि के रिश्ते को मैंने स्वीकार कर लिया है। मैंने अपने नसीब से समझौता कर लिया था।
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