मेरी मामी ने बाथरूम में मेरा लंड लिया

Bathroom mein hot mami ki chudai मेरा नाम अखिल है। मैं 22 साल का हूँ, जिम में पसीना बहाने वाला, सुगठित शरीर का मालिक। मेरी कद-काठी और मसल्स की वजह से लोग अक्सर मेरी तारीफ करते हैं। मैं हर सुबह एक घंटे की जॉगिंग और जिम में वर्कआउट करता हूँ, जिससे मेरा शरीर हमेशा फिट और चुस्त रहता है। पसीने से तर-बतर शॉर्ट्स में जब मैं बरामदे में स्क्वाट्स और पुश-अप्स करता हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे मैं किसी बॉलीवुड हीरो की तरह चमक रहा हूँ। लेकिन मैं सिर्फ़ शरीर ही नहीं, दिमाग से भी तेज़ हूँ। पढ़ाई में अव्वल, मैंने अपने लिए एक नियम बना रखा है—दिन में बस एक सेक्स कहानी पढ़ूंगा, बाकी समय किताबों और भविष्य को संवारने में लगाऊँगा।

मेरी मामी, रीता, 42 साल की हैं, लेकिन उनकी उम्र का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। उनका फिगर इतना टाइट और सेक्सी है कि कोई भी जवान लड़का उनकी ओर आकर्षित हो जाए। उनके बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और भारी-भरकम नितंब किसी को भी दीवाना बना सकते हैं। उनके होंठ हमेशा हल्की सी मुस्कान लिए रहते हैं, और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक रहती है, जैसे वो कुछ कहना चाहती हों। मेरे मामा, राजेश, एक मल्टीनेशनल कंपनी में बड़ा पद संभालते हैं और अक्सर विदेशी दौरों पर रहते हैं। उनकी बड़ी बेटी, अनन्या, हाल ही में एमएस करने ऑस्ट्रेलिया चली गई है, और छोटी बेटी, संगीता, 18 साल की है, जो 12वीं में पढ़ती है और दिनभर ट्यूशन में व्यस्त रहती है।

इस बार गर्मियों की छुट्टियों में मामी ने मुझे सहारनपुर से अपने गुरुग्राम वाले घर बुला लिया। मामा को 20 दिन के लिए जर्मनी जाना था, और मामी ने मुझसे कहा, “अखिल, मेरे साथ चलो, घर में अकेलापन नहीं लगेगा।” मेरे माता-पिता को हमारे करीबी रिश्ते पर भरोसा था, सो उन्होंने बिना ही हामी भर दी। मैं अपने कपड़े पैक करके गुरुग्राम पहुँच गया।

पहले कुछ दिन तो सामान्य बीते। मैं सुबह 5 बजे उठकर जॉगिंग के लिए निकलता, फिर बरामदे में तेल मालिश करता, 100 स्क्वाट्स, पुश-अप्स और बाकी व्यायाम करता। मामी मुझे बादाम वाला दूध देतीं, और मैं नहाने से पहले उसे गटक जाता। सुबह की चाय के वक्त हम सब बिस्तर पर बैठकर गप्पे मारते—मामी, मैं और संगीता। फिर दिनचर्या में सब अपने-अपने काम में व्यस्त हो जाते।

एक सुबह मामा जर्मनी रवाना हो चुके थे, और संगीता ट्यूशन के लिए निकलते वक्त “बाय” चिल्ला रही थी। मैं बरामदे में अपने रोज़ के व्यायाम में மग्न था, पसीने से भीगा हुआ, शॉर्ट्स और टी-शर्ट में। तभी मामी बाथरूम की ओर जा रही थीं। उनके कदमों की आवाज़ सुनकर मैंने उनकी तरफ देखा। उनकी नज़र मुझ पर पड़ी, और उनकी आँखें हल्की तिरछी हो गईं। उनकी वो नज़र, जैसे वो मुझे ऊपर से नीचे तक नाप रही हों, मुझे थोड़ा अजीब लगा। मैंने सोचा, “ये क्या था?” फिर मेरी नज़र अपने सफ़ेद शॉर्ट्स पर गई, और मैं चौंक पड़ा। मैंने उस दिन लंगोट नहीं पहना था, और मेरा लंड शॉर्ट्स के ऊपर से साफ़ उभरा हुआ दिख रहा था। मेरे गाल लाल हो गए, और मैंने मन ही मन ठान लिया कि कल से लंगोट ज़रूर पहनूँगा। मैंने फिर से वर्कआउट शुरू किया, लेकिन मन में एक अजीब सी हलचल थी।

अचानक मामी की आवाज़ आई, “अखिल!” उनकी आवाज़ में हल्की सी जल्दबाज़ी थी। मैं भागता हुआ बाथरूम की ओर गया। उन्होंने अंदर से कहा, “अखिल, मैं तौलिया भूल गई, प्लीज़ मेरे कमरे से ले आओ।” मैं उनके कमरे में गया, जहाँ बेड पर एक गुलाबी तौलिया पड़ा था। मैंने उसे उठाया और बाथरूम की ओर बढ़ा। दरवाज़ा हल्का सा खुला था, और मामी ने कहा, “अंदर आओ, इसे हुक पर टांग दो।” मैं अंदर गया, तौलिया टांगा, और बिना उनकी ओर देखे बाहर निकलने लगा।

तभी उनकी आवाज़ फिर आई, “अखिल, क्या तुम मेरी पीठ पर साबुन लगा सकते हो?” मेरे पैर ठिठक गए। मैंने हल्की सी हिचकिचाहट के साथ उनकी ओर देखा। उन्होंने मुझे साबुन थमाया, और अपनी पीठ मेरी ओर कर ली। उनका सफ़ेद पेटीकोट गीला था, और उसमें से उनका पूरा शरीर साफ़ दिख रहा था—पारदर्शी, जैसे कोई पतली सी चादर उनके जिस्म को ढक रही हो। उनकी गोरी, चिकनी पीठ, और नीचे उनके भारी नितंब, जिनकी दरार साफ़ दिख रही थी, मेरे होश उड़ा रहे थे। मेरा 7 इंच लंबा, 4 इंच मोटा लंड शॉर्ट्स में तन गया, और मेरे हाथ हल्के से काँपने लगे।

“ऊपर से शुरू करो,” उन्होंने धीमी, गहरी आवाज़ में कहा। मैंने उनकी गर्दन पर साबुन लगाना शुरू किया, लेकिन मेरी उंगलियाँ हल्की-हल्की काँप रही थीं। उन्होंने अपना पेटीकोट थोड़ा और नीचे सरकाया, और बोलीं, “पूरी पीठ पर लगाओ।” मैंने वैसा ही किया, लेकिन मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उनकी त्वचा इतनी मुलायम थी कि मेरे हाथों में करंट सा दौड़ गया। फिर उन्होंने पेटीकोट और नीचे किया, और कहा, “और नीचे, अखिल।” मेरे पास अब कोई चारा नहीं था। मैंने हिम्मत जुटाई और उनके गोल, भारी नितंबों पर साबुन रगड़ना शुरू किया। तभी, जैसे जानबूझकर, उन्होंने पेटीकोट को छोड़ दिया, और वो उनके पैरों पर गिर गया।

“पैरों पर भी साबुन लगाओ,” उनकी आवाज़ में अब एक अजीब सी उत्तेजना थी। मैं नीचे झुका, उनके पैरों पर साबुन लगाने लगा। उनकी जाँघें इतनी चिकनी थीं कि मेरा लंड और सख्त हो गया। फिर उन्होंने कहा, “पीछे से मेरे पेट पर साबुन लगाओ।” मैंने उनके पेट पर हाथ फेरना शुरू किया, और मेरे शरीर का हर हिस्सा अब उत्तेजना से भरा था। जैसे ही मैंने साबुन लगाया, मेरा तना हुआ लंड उनकी गांड की दरार से टकराने लगा। “आह्ह…” उनके मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली। मैं समझ गया कि वो भी गर्म हो रही थीं।

मैंने हल्के से उनके पेट पर साबुन रगड़ा, और मेरे हाथ धीरे-धीरे उनके भारी, गोल स्तनों की ओर बढ़े। जैसे ही मेरी उंगलियाँ उनके निप्पलों को छूईं, वो तुरंत सख्त हो गए, ऊपर की ओर उठे हुए। “उम्म्म… अखिल…” उनकी सिसकारी अब और गहरी थी। मैंने हिम्मत बढ़ाई और उनके स्तनों को हल्के से दबाया, उनके निप्पलों को उंगलियों से सहलाया। उनकी साँसें तेज़ हो गईं, और उन्होंने अचानक मेरे हाथ पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिए।

मैंने उनकी चूत को रगड़ना शुरू किया। वो गीली थी, इतनी गीली कि मेरी उंगलियाँ आसानी से उसकी तहों में फिसल गईं। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं, और वो छटपटाने लगीं। “आआह्ह… अखिल, और करो… और गहरा…” उनकी आवाज़ में वासना थी। मैंने उनकी चूत को और तेज़ी से रगड़ा, और वो अपनी जाँघें कसकर भींचने लगीं। “तुम बहुत अच्छे हो, अखिल… बहुत मज़बूत… मुझे चोदो… प्लीज़, यहीं फर्श पर चोद दो!” उन्होंने कराहते हुए कहा, और फिर पलटकर मेरी छाती पर चूमने लगीं। उनके होंठ मेरे होंठों से टकराए, और वो मुझे भूखी शेरनी की तरह चूसने लगीं।

एक झटके में उन्होंने मेरी शॉर्ट्स नीचे खींच दी। मेरा लंड देखकर उनकी आँखें चमक उठीं। “वाह… क्या लंड है, अखिल! इतना बड़ा, इतना मोटा… मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम इतना शानदार लंड रखते हो!” उन्होंने उत्साह में कहा और उसे पकड़ लिया। वो उसे चूसने की कोशिश करने लगीं, लेकिन मेरा लंड इतना मोटा था कि सिर्फ़ उसका सिरा ही उनके मुँह में फिट हुआ। “म्म्म्म…” वो उसे चाटने और चूसने लगीं, उनकी जीभ मेरे लंड के चारों ओर लपेट रही थी। मैं अब और काबू नहीं कर सका। मैंने उनके बाल पकड़े, उनके सिर को अपने लंड की ओर धकेला, और उसे और अंदर घुसाया। “उम्म्म… म्म्म…” उनकी सिसकारियाँ और तेज़ हो गईं।

जब उन्होंने मेरे लंड को बाहर निकाला, मैंने उन्हें उठाया और उनके एक निप्पल को अपने मुँह में लिया। दूसरा स्तन मैंने जोर से दबाया। “आआह्ह… अखिल, चोदो मुझे… इस लंड को मेरी चूत में डालो… इसे फाड़ दो!” वो चिल्लाईं। मैंने उनकी चूत को छुआ, वो इतनी गर्म थी कि जैसे ही मैंने उसे चाटना शुरू किया, वो तुरंत झड़ गईं। उनकी चूत से रस बहने लगा, और मैंने उसे चाटना शुरू किया। वो फर्श पर लेट गईं, मेरे चेहरे को अपनी चूत में और अंदर धकेलने की कोशिश करने लगीं। “आआह्ह… और चाटो, अखिल… मेरी चूत को चूस लो…” उनकी आवाज़ में बेताबी थी।

मैंने उनकी चूत के होंठ खोले, और अंदर के रस को चाटा। मेरी जीभ उनकी चूत में गहराई तक गई, और वो अपने कूल्हे उठाकर मेरे चेहरे पर रगड़ने लगीं। “अब डाल दो, अखिल… अपना लंड अंदर डालो… मेरी चूत फाड़ दो… मैं और नहीं सह सकती!” वो चिल्ला रही थीं। मैं भी अब काबू खो चुका था। मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखे, अपनी स्थिति बनाई, और उनकी चूत के होंठों को अलग किया। मेरे अंगूठे ने उनकी गुलाबी भगशेफ को रगड़ा, और और रस बहने लगा।

मैंने एक जोरदार धक्का मारा, लेकिन मेरा लंड फिसल गया। उनकी चूत मेरे मोटे लंड के लिए तैयार नहीं थी। मैंने दो उंगलियाँ डालीं, उन्हें अंदर-बाहर किया, उनकी चूत को फैलाया। जब मुझे लगा कि वो तैयार हैं, मैंने फिर से निशाना साधा और एक ज़ोरदार धक्का मारा। वो चिल्लाईं, “आआह्ह… धीरे, अखिल!” लेकिन मैंने उनके कंधों को पकड़कर नीचे दबाया, और मेरा लंड का सिरा अंदर चला गया। वो कराह रही थीं, लेकिन मैंने एक और धक्का मारा, फिर एक और, जब तक मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा नहीं गया।

“उम्म्म… कितना बड़ा है… आआह्ह…” वो सिसकार रही थीं। मैंने धक्कों की बौछार शुरू की—पच-पच, पच-पच—हर धक्के के साथ उनका पूरा शरीर हिल रहा था। “जोर से, अखिल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो!” वो चिल्ला रही थीं। मैंने 15 मिनट तक उन्हें लगातार चोदा, मेरा 7 इंच का लंड उनकी गहराई में उतर रहा था। वो मेरे हर धक्के के साथ अपने कूल्हे उठा रही थीं, “हाँ… ऐसा ही… तुम्हारा लंड इतना मज़बूत है… फाड़ दो इसे!” वो कई बार झड़ चुकी थीं, उनकी चूत से रस बह रहा था।

अब मेरी बारी थी। मैंने गति बढ़ाई, जैसे कोई तेज़ रफ़्तार ट्रेन। “आआह्ह… अखिल… और तेज़… मेरी चूत को चोद डालो!” वो चीख रही थीं। उन्होंने अपने पैर और बाहें मेरे चारों ओर लपेट लिए, और एक बार फिर झड़ गईं। मैं भी अब चरम पर था। एक शक्तिशाली धक्के के साथ, मैंने अपना गर्म, गाढ़ा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया। “आआह्ह…” हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरा वीर्य उनकी चूत से बह निकला, और मैं लगातार तीन मिनट तक छोड़ता रहा।

जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला, तो उनकी चूत से रस और मेरा वीर्य मिलकर बह रहा था। “कितना माल छोड़ा है तूने, अखिल!” उन्होंने हँसते हुए कहा। हम दोनों साथ नहाए, एक-दूसरे को सहलाते हुए। बाहर आने के बाद, मामी ने कहा, “मैंने कभी ऐसा मज़ा नहीं लिया, अखिल। मेरी चूत में दर्द है, लेकिन कोई बात नहीं।” वो हल्का लंगड़ाते हुए चल रही थीं, लेकिन उनकी आँखों में संतुष्टि की चमक थी।

मैं उनकी गोल, मुलायम गांड को देखकर फिर से मंत्रमुग्ध था। शर्म अब जा चुकी थी, तो मैंने कहा, “मामी, मैं आपकी गांड मारना चाहता हूँ।” उन्होंने एक पल सोचा, फिर मुस्कुराते हुए बोलीं, “संगीता शाम 4 बजे तक नहीं आएगी, हमारे पास पूरा दिन है।”

आपको मेरी ये सच्ची कहानी कैसी लगी? कृपया मुझे बताएँ। मैं अगली कहानी में बताऊँगा कि मैंने अपनी मामी की गांड कैसे चोदी।

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