मेरे प्यारे पाठकों, नमस्ते! कृपया मेरा हार्दिक अभिनंदन स्वीकार करें। मैं, टी पी एल, आप सभी के मनोरंजन के लिए एक अनाम युवती की सच्ची कहानी को अपने शब्दों में पेश कर रही हूँ। कुछ समय पहले एक पाठक युवती ने मुझे अपने जीवन की एक बेहद निजी और उत्तेजक घटना के बारे में लिखा था। उसने मुझसे आग्रह किया कि मैं उसकी कहानी को संपादित कर, उसे और आकर्षक बनाकर, आप सभी के साथ साझा करूँ। लेकिन उसने अपनी और अपने परिवार की गोपनीयता बनाए रखने की शर्त रखी, इसलिए मैं केवल वही जानकारी साझा कर रही हूँ, जो उसने मुझे दी, और वह भी पूरी तरह से उसकी गोपनीयता का सम्मान करते हुए।
प्रिय पाठकों, मैं अपनी पहचान और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर सतर्क हूँ। इसीलिए मैं अपनी निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं कर सकती। मुझे उम्मीद है कि आप मेरी इस मजबूरी को समझेंगे और मेरी निजता का सम्मान करेंगे। अब मैं आपको उस घटना की कहानी सुनाती हूँ, जो मेरे जीवन में घटी और जिसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया।
लगभग पाँच साल पहले, मुझे अपनी कॉलेज की पढ़ाई के लिए अपने गाँव से दूर एक छोटे से शहर में जाना पड़ा। मेरा परिवार निम्न मध्यम वर्ग का है, इसलिए मैंने हॉस्टल में रहने के बजाय अपनी एक सहपाठी सखी, रीना, के साथ मिलकर एक निजी घर में पेइंग गेस्ट के रूप में रहना शुरू किया। वह घर पुराना लेकिन साफ-सुथरा था, जिसमें तीन बेडरूम थे। एक बेडरूम में गृहस्वामी श्रीकांत जी और उनकी पत्नी सुमन रहते थे। दूसरा बेडरूम उनके इकलौते बेटे, राहुल, और उसकी पत्नी, प्रिया, के लिए था, जो पास के बड़े शहर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते थे और महीने में एक बार अपने माता-पिता से मिलने आते थे। तीसरा बेडरूम हम दोनों सहेलियों, मेरे और रीना, के लिए था।
हमारे और गृहस्वामी के बेडरूम के बीच एक साझा बाथरूम और शौचालय था, जिसमें दो दरवाजे थे—एक उनके कमरे की ओर खुलता था और दूसरा हमारे कमरे की ओर। श्रीकांत जी की उम्र 46 साल थी, और उनकी छोटी सी दुकान पास के बाजार में थी, जहाँ रोजमर्रा की चीजें बिका करती थीं। सुमन जी, 43 साल की, एक गृहिणी थीं, जो घर संभालती थीं और अपनी सादगी के लिए जानी जाती थीं। उनका बेटा राहुल, 23 साल का, और उसकी पत्नी प्रिया, 22 साल की, बड़े शहर में रहते थे, लेकिन जब भी आते, घर में रौनक सी छा जाती।
उस रात की बात है, जब घड़ी में ग्यारह बजने वाले थे। मैं अपनी पढ़ाई पूरी कर चुकी थी और सोने की तैयारी कर रही थी। अगले दिन सुबह जल्दी उठना था, इसलिए मैंने किताबें बंद कीं और बाथरूम में लघुशंका के लिए गई। जैसे ही मैं शौचालय में थी, मुझे गृहस्वामी के कमरे से कुछ असामान्य आवाजें सुनाई दीं। उनके कमरे की ओर खुलने वाले दरवाजे के नीचे से हल्की-सी रोशनी झाँक रही थी, और आवाजें ऐसी थीं कि मेरी जिज्ञासा जाग उठी। मैंने साँस रोककर उन आवाजों पर ध्यान देना शुरू किया।
पहले तो मुझे लगा कि शायद कोई बातचीत हो रही है, लेकिन जल्द ही मैं समझ गई कि ये आवाजें श्रीकांत जी और सुमन जी की थीं। मैं चुपके से बैठी रही, मेरी साँसें हल्की-हल्की चल रही थीं। फिर मैंने सुना कि श्रीकांत जी अपनी पत्नी से कुछ अंतरंग बातें कर रहे थे। उनकी आवाज में एक अजीब-सी बेताबी थी। “सुमन, आज रात कुछ खास हो जाए… तुम्हें पता है ना, कितने दिन हो गए,” उन्होंने धीमे लेकिन भारी स्वर में कहा। सुमन जी ने हल्के से हँसते हुए जवाब दिया, “अरे, धीरे बोलो, कहीं कोई सुन न ले।” उनकी आवाज में शर्मिंदगी थी, लेकिन साथ ही एक चंचलता भी।
मेरी जिज्ञासा अब और बढ़ गई। मैंने धीरे से दरवाजे की ओर देखा। वह हल्का-सा खुला था, शायद गलती से। मैंने हिम्मत जुटाकर उसे और खोला, सिर्फ इतना कि अंदर का दृश्य दिख सके। नाइट लैंप की मद्धम रोशनी में मैंने देखा कि श्रीकांत जी और सुमन जी बिस्तर पर थे, पूरी तरह नग्न। मेरी साँसें तेज हो गईं। मैं जानती थी कि मुझे वहाँ से चले जाना चाहिए, लेकिन मेरे पैर जैसे जम गए।
वे दोनों 69 की अवस्था में थे, एक-दूसरे के गुप्तांगों को चूम रहे थे, चाट रहे थे। श्रीकांत जी अपनी जीभ से सुमन जी की योनि को सहला रहे थे, कभी उनके भगनासा को चूस रहे थे, तो कभी उनकी योनि के होंठों को अपनी जीभ से रगड़ रहे थे। सुमन जी “आह्ह… उह्ह…” की हल्की सिसकारियाँ ले रही थीं, और उनके हाथ श्रीकांत जी के लिंग को पकड़े हुए थे। वह धीरे-धीरे उनके लिंग को मुँह में ले रही थीं, कभी उनकी अंडकोष को सहलातीं, तो कभी उनके लिंग के सिरे को चूसतीं। “सुमन, कितना मस्त लग रहा है… और जोर से चूसो,” श्रीकांत जी ने सिसकारी लेते हुए कहा।
सुमन जी ने हल्के से हँसते हुए जवाब दिया, “तुम भी तो मेरी चूत को चाटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।” उनकी बातों में एक खुलापन था, जो मुझे हैरान कर रहा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतने साधारण से दिखने वाले लोग इतने बिंदास हो सकते हैं।
करीब दस मिनट तक यह क्रिया चलती रही। सुमन जी की सिसकारियाँ तेज हो गईं, “आह्ह… श्रीकांत… बस… अब और नहीं… उह्ह…” उनकी टाँगें अकड़ने लगीं, और अचानक उन्होंने श्रीकांत जी का सिर अपनी योनि पर जोर से दबाया। उनकी योनि से रस की बौछार निकली, और वह निढाल होकर बिस्तर पर लेट गईं। लेकिन श्रीकांत जी रुके नहीं। उन्होंने सुमन जी की योनि को चाटना जारी रखा, हर बूंद को चूस लिया, जैसे कोई भूखा हो। सुमन जी फिर से उत्तेजित हो उठीं, उनकी सिसकारियाँ फिर शुरू हो गईं, “आह्ह… तुम तो मेरी जान ले लोगे… बस करो ना…”
मैं वहाँ खड़ी थी, मेरी साँसें तेज थीं, और मेरे शरीर में एक अजीब-सी सनसनी दौड़ रही थी। मेरी योनि में गुदगुदी होने लगी थी, और अनायास ही मेरा हाथ मेरी पैंटी के अंदर चला गया। मैंने धीरे-धीरे अपनी योनि को सहलाना शुरू किया, मेरी उंगलियाँ मेरे भगनासा को रगड़ रही थीं। मैंने कभी ऐसा पहले नहीं किया था, लेकिन उस पल में मेरे शरीर ने जैसे खुद-ब-खुद रास्ता ढूंढ लिया।
उधर, सुमन जी अब पूरी तरह उत्तेजित थीं। उन्होंने श्रीकांत जी से कहा, “बस अब चाटना बंद करो… मुझे तुम्हारा लंड चाहिए… जल्दी डालो ना…” उनकी आवाज में एक बेताबी थी। श्रीकांत जी ने हँसते हुए कहा, “अरे, इतनी जल्दी क्या है, मेरी रानी? अभी तो मैं तुम्हें और तड़पाऊंगा।” लेकिन सुमन जी ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने श्रीकांत जी को खींचकर सीधा किया और अपनी टाँगें चौड़ी कर दीं। श्रीकांत जी उनके बीच में बैठ गए, उनका लिंग पूरी तरह तना हुआ था, करीब 7 इंच लंबा और मोटा, जो मद्धम रोशनी में चमक रहा था।
श्रीकांत जी ने अपने लिंग को सुमन जी की योनि के होंठों पर रगड़ना शुरू किया। सुमन जी तड़प रही थीं, “उह्ह… श्रीकांत… अब डाल भी दो… कितना तड़पाओगे?” लेकिन श्रीकांत जी ने जानबूझकर देर की। उन्होंने अपने लिंग के सिरे को सुमन जी के भगनासा पर रगड़ा, जिससे सुमन जी और बेचैन हो गईं। आखिरकार, सुमन जी ने हार मान ली और अपने हाथ से श्रीकांत जी का लिंग पकड़कर अपनी योनि के मुहाने पर रख दिया। उन्होंने नीचे से उचककर उनके लिंग के सिरे को अपनी योनि में प्रवेश करा लिया।
जैसे ही लिंग का सिरा अंदर गया, सुमन जी के मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली, “आह्ह… कितना मोटा है… उह्ह…” श्रीकांत जी ने भी सिसकारी ली, “सुमन, तुम्हारी चूत कितनी गर्म है… आह्ह…” फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने पूरे लिंग को सुमन जी की योनि में उतार दिया। सुमन जी के चेहरे पर एक तृप्ति का भाव था, जैसे उनकी कोई अधूरी ख्वाहिश पूरी हो गई हो।
कुछ पल तक वे दोनों उसी अवस्था में रहे, एक-दूसरे को चूमते हुए, एक-दूसरे के शरीर को सहलाते हुए। फिर श्रीकांत जी ने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को हिलाना शुरू किया, उनका लिंग सुमन जी की योनि में अंदर-बाहर होने लगा। हर धक्के के साथ एक ‘फच… फच…’ की आवाज कमरे में गूंज रही थी, जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। सुमन जी ने सिसकारियाँ लेनी शुरू कीं, “आह्ह… और जोर से… श्रीकांत… उह्ह… चोदो मुझे…” उनकी आवाज में एक जुनून था।
श्रीकांत जी ने अपनी गति बढ़ा दी। उनके धक्के अब और तेज हो गए थे, और सुमन जी भी नीचे से उचक-उचककर उनका साथ दे रही थीं। “हाँ… सुमन… ले मेरी रानी… कितनी टाइट है तुम्हारी चूत…” श्रीकांत जी ने उत्तेजना में कहा। सुमन जी ने जवाब दिया, “आह्ह… तुम्हारा लंड मुझे पागल कर देगा… और जोर से…” दोनों की सिसकारियाँ और योनि से निकल रही ‘फच-फच’ की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।
मेरी उंगलियाँ अब मेरी योनि में तेजी से चल रही थीं। मेरी साँसें उखड़ रही थीं, और मेरी योनि गीली हो चुकी थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं खुद को इस तरह उत्तेजित करूँगी, लेकिन उस दृश्य ने मेरे अंदर की सारी हिचक तोड़ दी थी।
करीब दस मिनट तक यह तीव्र चुदाई चलती रही। अचानक सुमन जी ने जोर से चिल्लाया, “आह्ह… श्रीकांत… बस… मैं गई… उह्ह…” उनकी योनि से फिर से रस की बौछार निकली, और वह निढाल होकर बिस्तर पर लेट गईं। लेकिन श्रीकांत जी रुके नहीं। उन्होंने अपनी गति बनाए रखी, और कुछ ही पलों में सुमन जी फिर से उत्तेजित हो गईं। अब वह और जोश के साथ श्रीकांत जी का साथ दे रही थीं, अपने कूल्हों को और तेजी से उछाल रही थीं।
“सुमन, तुम्हारी गांड कितनी मस्त है… इसे भी तो चोदूँ?” श्रीकांत जी ने हँसते हुए कहा। सुमन जी ने शरारत से जवाब दिया, “हाय… पहले मेरी चूत को तो संभाल लो… फिर गांड की बात करना।” उनकी बातों ने माहौल को और उत्तेजक बना दिया।
लगभग पंद्रह मिनट तक यह चुदाई चलती रही। दोनों की सिसकारियाँ अब चरम पर थीं। “आह्ह… उह्ह… श्रीकांत… और तेज… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…” सुमन जी चिल्लाईं। श्रीकांत जी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, उनके धक्के इतने तेज थे कि बिस्तर हिल रहा था। अचानक दोनों ने एक साथ जोर की सिसकारी ली, “आह्ह… उह्ह…” श्रीकांत जी ने अपने लिंग से वीर्य की पिचकारी सुमन जी की योनि में छोड़ी, और सुमन जी की योनि ने भी रस की बौछार की। दोनों एक-दूसरे से लिपटकर निढाल हो गए।
उसी पल मेरी योनि ने भी रस छोड़ दिया। मेरे मुँह से एक हल्की-सी सिसकारी निकली, “आह…” शायद मेरी आवाज उन दोनों तक पहुँच गई थी, क्योंकि अचानक दोनों ने शौचालय की ओर देखा। मैंने तुरंत दरवाजा बंद किया और भागकर अपने कमरे में आ गई। मैंने दरवाजे को चटकनी से बंद कर लिया, लेकिन मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मेरी साँसें तेज थीं, और मेरा पूरा शरीर काँप रहा था।
कुछ देर बाद, जब मुझे लगा कि श्रीकांत जी और सुमन जी बाथरूम से चले गए, तब मैंने राहत की साँस ली। मैं अपने कमरे के बीच में खड़ी थी, मेरी पैंटी पूरी तरह गीली थी, मेरी जाँघें और टाँगें मेरे ही रस से भीगी हुई थीं। मैं दोबारा बाथरूम जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई और उसी हालत में अपने बिस्तर पर लेट गई।
तो मेरे प्यारे पाठकों, यह थी मेरे जीवन की वह उत्तेजक रात, जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया। क्या आपको लगता है कि मेरी यह कहानी आपको उत्तेजित कर पाई? कृपया अपने विचार कमेंट में साझा करें, ताकि मैं और बेहतर लिख सकूँ।